2 घंटे ब्यूटी किट से सजाया, फिर मैदान में उतरी 'पाली'... IVRI डाग शो में 200 श्वानों के बीच छाया शाही जलवा
आइवीआरआइ के डाग शो में 200 से अधिक श्वानों ने अपनी खूबसूरती और हुनर का प्रदर्शन किया, जिसमें सामोयेद नस्ल ...और पढ़ें

शो में प्रतियोगिता से पूर्व पाली का मेकअप करते हुए चांद। जागरण
HighLights
देशभर से आए श्वानों ने लिया हिस्सा, मलेशिया और जापान के निर्णायकों ने किया मूल्यांकन
हिमांशु अग्निहोत्री, बरेली। आईवीआरआई के डाग शो में 200 से अधिक श्वानों ने अपनी खूबसूरती, फुर्ती और हुनर से दर्शकों को आकर्षित किया, लेकिन महफिल लूटने में चार साल के दीनार और तीन साल की पाली सबसे आगे रहे। दीनार की प्यारी मुस्कान और सफेद रोएंदार फर पर दर्शक फिदा नजर आए तो पाली के सुनहरे लंबे बालों और शाही अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा। दोनों की लोकप्रियता का आलम यह था कि दर्शक उनकी तस्वीरें लेने के साथ ही उनकी नस्ल और नाम भी पूछते नजर आए।
डाग शो में भारी-भरकम और तेजतर्रार श्वानों के बीच दीनार की मासूम मुस्कान और पाली का नखरीला अंदाज दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। सामोयेद नस्ल के दीनार की खासियत उसका बर्फ जैसा सफेद, घना और रोएंदार फर है।

उसके चेहरे पर हमेशा बनी रहने वाली मुस्कान और शांत स्वभाव ने उसे दूसरे श्वानों से अलग पहचान दी। उसका फोटोजेनिक अंदाज भी दर्शकों को खूब भाया। मैदान में दीनार की हर अदा पर कैमरे चमकते रहे।
कोई उसके साथ तस्वीर खिंचवाने को उत्सुक था तो कोई उसकी खूबसूरती को मोबाइल में कैद करने में जुटा था। दिल्ली निवासी दीनार के स्वामी सुशांत ने बताया कि सामोयेद को दुनिया की खूबसूरत और प्राचीन श्वान नस्लों में गिना जाता है।
इसका घना सफेद फर और मुस्कुराता चेहरा इसकी खास पहचान है। दीनार के खानपान, शैंपू और देखभाल पर हर महीने करीब 30 हजार रुपये खर्च होते हैं। उसकी खूबसूरती बनाए रखने के लिए विशेष देखभाल करनी पड़ती है।
भारी-भरकम ब्यूटी किट और मैदान में जलवा
यार्कशायर टेरियर नस्ल की पाली भी किसी सितारे से कम नहीं दिखी। उसके चमकीले सुनहरे लंबे बाल आंखों के आसपास तक लटक रहे थे। पंजाब से आए मेकअप आर्टिस्ट चांद बहल भारी-भरकम ब्यूटी किट के साथ उसे तैयार करने में जुटे रहे।
बालों को संवारने, चोटी बनाने और आकर्षक लुक देने में करीब दो घंटे लगे। इसके बाद जब पाली मैदान में उतरी तो दर्शकों के कैमरे उसकी ओर घूम गए।
पाली के स्वामी सुनील घई ने बताया कि उसे तैयार करने में रोजाना दो से तीन घंटे लगते हैं। पाली चैंपियन क्लास की श्वान है और कई प्रतियोगिताओं में विजेता रह चुकी है। मूल रूप से ब्रिटेन की इस नस्ल के लंबे, रेशमी बाल इसकी खास पहचान हैं।
श्वानों ने दिखाया हुनर, विशेषताओं से बने विजेता
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में रुहेलखंड केनेल क्लब की ओर से आल इंडिया आल ब्रीड्स चैंपियनशिप डाग शो का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय नस्लों के साथ विदेशी नस्लों के श्वान भी आकर्षण का केंद्र रहे।
बेस्ट पपी डाबरमैन और बेस्ट माइनर पपी कैविलियर बना। पहला स्थान बरेली के केन कोरसो और दिल्ली के सेमोयेड ने हासिल किया। वहीं, दूसरे स्थान पर रामपुर का डाबरमैन और यमुनानगर का शिटजू रहा।

तीसरा पायदान मेरठ के जर्मन शेफर्ड और देहरादून के चिहुआहुआ ने हासिल किया। सभी के स्वामियों को ट्राफी व प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। मूल्यांकन मलेशिया से वेंग वोह चान और जापान से सेइशिरो इकुता निर्णायक के रूप में किया।
उन्होंने निर्धारित नस्लीय मानकों के आधार पर श्वानों की बनावट, चाल, प्रस्तुति और विशेषताओं का आकलन किया। अलग-अलग नस्लों के श्वानों ने अपने हैंडलर के साथ रिंग में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन और शारीरिक विशेषताओं को परखने के बाद विजेताओं का चयन किया। इस दौरान क्लब के अध्यक्ष दिलीप कुमार टंडन, सचिव सेवानिवृत्त कर्नल गुरदीप सिंह, कोषाध्यक्ष पवन भासिन, उपाध्यक्ष अमित यादव, संयुक्त सचिव डा. डीके सक्सेना आदि मौजूद रहे।
विदेशी मेहमानों ने घूमा शहर
मलेशिया से आए वेंग वोह चान ने बताया कि भारत में श्वान की नस्ल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वह 25 साल से भारत आ रहे हैं। बरेली के बारे में कहा, शहर बहुत अच्छा लगा। यहां सिविल लाइन स्थित हनुमान मंदिर घूमे, कपड़े भी सिलवाए हैं।
