बरेली, जेएनएन। मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति और खपत अब सामान्य हो चुकी है। कोविड मरीजों की संख्या भी कम हो गई, लेकिन ऑक्सीजन को लेकर टेंशन बरकरार है। अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने ऑक्सीजन के दाम को लेकर बखेड़ा खड़ा कर दिया है। उनकी मांग है कि कोविड से पहले जिस रेट पर ऑक्सीजन मिल रही थी, उसी रेट पर दी जाए। वहीं ऑक्सीजन इंडस्ट्रियल और ऑक्सीजन सप्लायर डीजल, लेबर आदि महंगा होने का हवाला दे रहे हैं। इसे लेकर आइएमए ने डीएम को ज्ञापन दिया तो उपायुक्त उद्योग को मामले को सुलझाने का जिम्मा दिया गया। शनिवार को उपायुक्त उद्योग की मौजूदगी में बैठक हुई, लेकिन उसमें कोई निष्कर्ष नहीं निकला।

बैठक के दौरान आइएमए के पदाधिकारी और ऑक्सीजन इंडस्ट्री संचालक और ऑक्सीजन सप्लायर मौजूद रहे। उपायुक्त आयुक्त ऋषि रंजन गोयल ने दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया। इस पर आइएमए के अध्यक्ष डा. मनोज अग्रवाल ने कहाकि कोविड की पहली लहर जब आई तो उस समय जंबो साइज ऑक्सीजन सिलिंडर 250 रुपये में अस्पताल पहुंच रहा था। कोविड की पहली लहर में इसके दाम बढ़ाकर तीन सौ रुपये किए गए। इसके बाद दूसरी लहर में इसके दाम और बढ़ा दिए गए। अब अस्पतालों तक यही सिलिंडर चार सौ रुपये में पहुंच रहा है। उनका कहना था कि शासनादेश के मुताबिक उन्हें सिलिंडर अस्पताल में 250 रुपये तक पहुंचना चाहिए, क्योंकि सरकारी दर 178 रुपये की है।

इसके अलावा उन्होंने कहाकि सप्लायर और इंडस्ट्रियल प्रति सिलिंडर 25 रुपये किराया भी मांग रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब उनसे सिलिंडर का किराया मांगा जा रहा है। वहीं एसपी ऑक्सीजन इंडस्ट्री के संचालक राजेंद्र गुप्ता ने कहाकि लगातार महंगाई बढ़ रही है। डीजल के पूर्व के दाम से अब तक 20 से 25 रुपये का फर्क आ चुका है। लेबर के दाम बढ़ गए हैं। प्लांट पर अन्य खर्चे भी बढ़े हैं। ऐसे में पूर्व के दाम पर कैसे ऑक्सीजन दी जाए। कहाकि बीते दिनों कई सिलिंडर गायब हो गए हैं, जो कि काफी महंगे आते हैं। अस्पतालों में सिलिंडर डंप हैं, इसलिए किराया लेने की बत कही गई। फिलहाल शनिवार को हुई बैठक बेनतीजा रही। उपायुक्त उद्योग ऋषि रंजन गोयल ने बताया कि जल्द ही दोबारा बैठक बुलाकर इसका हल निकाला जाएगा।

Edited By: Samanvay Pandey