बरेली, जेएनएन। आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन की बरेली जंक्शन रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी के बाद से रेलवे के साथ ही पुलिस प्रशासन में खलबली मची है। मामला बरेली के मुस्लिम क्षेत्र में कांवड़ यात्रा निकालने को लेकर है। बरेली स्टेशन मास्टर के नाम धमकी भरा पत्र भेजने वाले ने खुद को आतंकी संगठन आइएम का एरिया कमांडर बताया है। 

बरेली जंक्शन रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। स्टेशन मास्टर को डाक के जरिये खत भेजने वाले ने खुद को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) का एरिया कमांडर मुन्ने खां उर्फ मुल्ला बताया है। उसने मुस्लिम क्षेत्र में कांवड़ यात्रा निकालने पर जंक्शन को बम से उड़ाने की धमकी दी है। इस खत मिलने के बाद स्टेशन के अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। यहां पर रात में आनन-फानन जंक्शन पर आरपीएफ और जीआरपी जवानों की गश्त तेज कर चेकिंग अभियान शुरू किया।

जिला प्रशासन और सिविल पुलिस को भी इसकी जानकारी दी गई। जिसके बाद शीर्ष प्रशासनिक अफसर, खुफिया विभाग के साथ सिविल पुलिस ने भी जंक्शन पर लगातार कई चरणों में निरीक्षण और निगरानी शुरू की। बम और डॉग स्क्वाड से भी जंक्शन का चप्पा-चप्पा छाना गया। दरअसल, पूर्व में भी ऐसे धमकी भरे पत्र रेलवे स्टेशन मास्टर के नाम आ चुके हैं। इस धमकी को गंभीरता लेते हुए एसएसपी मुनिराज ने ख़ुफ़िया ईकाइयों को सक्रिय कर सघन चेकिंग शुरू करवा दी है। सीओ सिटी अशोक कुमार यादव ने बताया कि बरेली जंक्शन पर सघन तलाशी ली गई है। उन्होंने बताया कि एक धमकी भरा ख़त भी मिला है। उसको संज्ञान में लेते हुए भी सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है, लेकिन पुलिस पूरी तरह से चौकसी बरत रही है।

बरेली जंक्शन उड़ाने की धमकी के बाद सतर्कता 

खतरनाक आंतकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के कथित एरिया कमांडर 'मुल्ला' के बरेली जंक्शन को बम से उड़ाने की धमकी को लेकर पुलिस-प्रशासन काफी संजीदा है। गुरुवार को एडीजी अविनाश चंद्र जंक्शन पर निरीक्षण के लिए पहुंचे उन्होंने जीआरपी और आरपीएफ अधिकारियों को सुरक्षा में किसी तरीके की कोताही न बरतने के निर्देश दिए। वहीं जंक्शन पर चेकिंग के लिए मौजूद साधन संसाधन को भी देखा। गौरतलब है कि खुद को इंडियन  मुजाहिदीन (आइएम) का एरिया कमांडर बताने वाले मुन्ने खां उर्फ मुल्ला ने बरेली जंक्शन के अधीक्षक को डाक से धमकी भरी चिट्ठी भेजी थी ।  कांवड़ यात्रा शुरू होते ही आतंकी संगठन की धमकी मिलने ने पुलिस और प्रशासन सकते में है।

यह लिखा है धमकी भरे खत में

मुन्ने खां उर्फ मुल्ला, एरिया कमांडर, आइएम, बरेली मंडल के खत में लिखा है कि मैं एरिया कमांडर आइएम, रेलवे स्टेशन मास्टर को अवगत कराता हूं कि मुसलमान क्षेत्र में कांवड़ यात्र निकली तो जंक्शन को उड़ा दूंगा। अभी मैं शांति से काम चाहता हूं। आप शासन-प्रशासन को अवगत करा देना। 

साफ नहीं खत पर लगी मुहर

बरेली स्टेशन मास्टर के पास डाक के जरिए पहुंचे खत में दो मुहर लगी हैं। एक बरेली की रिसीङ्क्षवग मुहर है। वहीं, लिफाफे के अगले हिस्से पर डाक टिकट के साथ लगी मुहर साफ नहीं है। बावजूद इसके संबंधित जांच अधिकारी टिकट और मुहर के जरिए डाक महकमे की मदद से यह पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं कि खत कहां से भेजा गया।

पता किया जा रहा है खत का सच

एडीजी, अविनाश चंद्र ने बताया कि धमकी भरे खत का सच पता किया जा रहा है। पुलिस सतर्क है। चेकिंग भी कराई गई है। अगर किसी की खुराफात है तो उस पर भी कार्रवाई कराई जाएगी।

खत के लिफाफे पर लिखा 'सेवा में'

कथित रूप से आइएम के एरिया कमांडर मुल्ला के खत को लेकर अधिकारी संशय में हैं। वजह, खत में स्टेशन मास्टर बरेली को संबोधित करते हुए 'सेवा में' लिखा है। जानकार बताते हैं कि अमूमन आतंकी संगठन इस तरह के शब्द से संबोधित नहीं करते। बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन या खुफिया विभाग धमकी भरे खत को पूरी संजीदगी से ले रहा।

स्टेशन पर बम मिल जाता तो डिफ्यूज कैसे होता

इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के कथित एरिया कमांडर की ओर से धमकी भरा खत स्टेशन मास्टर को मिला-लिखा था कि बरेली जंक्शन को बम से उड़ा देंगे। प्रशासन, पुलिस और खुफिया महकमा हाई अलर्ट पर आ गया। आनन-फानन जंक्शन पर बम खोजी दस्ता और डॉग स्क्वाड भी जा पहुंचा। लेकिन एक बड़ा सवाल कि अगर बम मिल जाता तो इसे डिफ्यूज कैसे करते? क्योंकि मंडल मुख्यालय होने के बावजूद यहां सिविल पुलिस के पास बम निरोधक दस्ता नहीं है। वो तो गनीमत है कि यहां प्रादेशिक सशस्त्र बल (पीएसी) की आठवीं बटालियन है। जिसके पास एक स्क्वॉड है और इसी के भरोसे पूरा मंडल है। हालांकि कई बार यह दस्ता वीआइपी नेताओं की सुरक्षा में शहर से बाहर भेजा जाता है। ऐसे में मंडल स्तर पर भी एंटी बॉम्ब स्क्वाड की जरूरत है।

मुख्यालय से मिलता है ड्यूटी रोस्टर

पीएसी के बम निरोधक दस्ते में कुल आठ लोग हैं। सूबेदार इस दस्ते को लीड करते हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि मुख्यालय से इस दस्ते का प्रोग्राम तय हो जाता है। इसके बाद वीआइपी नेताओं की मूवमेंट के आधार पर उनकी सुरक्षा के लिए इनकी ड्यूटी प्रदेश में इधर-उधर लगाई जाती है। सूबेदार संजय के मुताबिक शहर में होने पर दस्ता सूचना के अधिकतम बीस मिनट में रवाना हो जाता है।

..तो खोजी दस्ता ही निभाता है भूमिका

जिले में दो बम खोजी दस्ता हैं। एक रेंज में दूसरी डीआइजी की टीम में। एंटी बॉम्ब स्क्वाड ना होने पर बम खोजी दस्ते पर ही दारोमदार होता है। यह दस्ता बम निष्क्रिय भले ही ना कर सकता हो लेकिन यह सुनिश्चित करता है कि बम किस तरह विस्फोट करें कि नुकसान कम से कम हो। इसलिए लोगों को हटाकर बम के आसपास बालू, मौरंग से भरी बोरियां लगाकर ब्लास्ट किया जाता है।

पहले भी मिल चुकी रेलवे जंक्शन उड़ाने की धमकियां

बीते वर्ष पांच अक्टूबर को भी जंक्शन को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। पांच अक्टूबर को हरिद्वार स्टेशन अधीक्षक को मिले खत में कथित रूप से जम्मू कश्मीर के किस्तवाड़ा के आतंकी कमांडर मो. अमानी सलीम ने 20 अक्टूबर को हरिद्वार,बरेली, देहरादून, रुड़की, सहारनपुर, अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रामपुर, मुरादाबाद के जंक्शन को बम से उड़ाने की धमकी दी थी।

बरेली का रहा है आतंकी कनेक्शन

शहर का नाम आतंकी गतिविधियों में पहले भी शामिल रहा है। वर्ष 2015 में मेरठ से गिरफ्तार हुआ आइएसआइ एजेंट परवेज उर्फ एजाज लंबे समय प्रेमनगर के एक मुहल्ले में रहा था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से तमाम सुबूत मिले थे, जिससे साफ था कि सेना के महत्वपूर्ण इलाकों को उसने कैमरे में कैद किया था। बंगलुरु में हुए बम विस्फोट में शीशगढ़ के इरफान का नाम सामने आया था। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से गिरफ्तार हुए आइएसआइ एजेंट रमेश सिंह ने भी बरेली की रेकी की थी। कानपुर ब्लास्ट और रामपुर में सीआरपीएफ कैंप हमले में भी बरेली से जुड़े लोगों का नाम आया था।

 

Posted By: Abhishek Pandey

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