बरेली, जेएनएन : जिला अस्पताल प्रशासन ने बदहाल होती सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए अंतत: गुरुवार को सख्त कदम उठाया। तीन दिन से हड़ताल पर गए चार सफाई कर्मचारियों को निकाल दिया गया, जबकि 44 का वेतन काटा गया है। साथ ही, आउटसोर्सिग कंपनी को भी चेतावनी दी गई है।

अस्पताल परिसर के अलावा वार्डो की सफाई व्यवस्था के लिए आउटसोर्सिग पर 48 सफाई कर्मचारी रखे गए थे। उन कर्मचारियों को वेतन व अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का जिम्मा आउटसोर्सिग कंपनी का है। ऐसे में कुछ समय से चार कर्मचारी बगैर किसी सूचना के लापरवाही बरतने लगे तो कंपनी को इस बारे में अस्पताल प्रशासन की ओर से सूचना दी गई, इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। तीन दिन पहले कर्मचारियों ने अचानक हड़ताल शुरू कर दी। इससे सफाई व्यवस्था बिगड़ने लगी। अस्पताल प्रशासन ने इस बारे में फिर आउटसोर्सिग कंपनी को बताया लेकिन कोई हल नहीं निकला। इधर, अस्पताल में गंदगी फैलती जा रही थी। काफी प्रयास के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ तो सर्वाधिक लापरवाही करने वाले चार सफाई कर्मचारी चिह्न्ति किए गए। गुरुवार को अस्पताल प्रशासन ने इन चार कर्मचारियों को काम से निकालते हुए बाकी के वेतन काटने की कार्रवाई की। साथ ही कंपनी को चेतावनी दी गई है।

कार्रवाई होते ही काम पर लौटे कर्मचारी 

जिला अस्पताल में तीन दिन से हड़ताल कर रहे कर्मचारी किसी की बात मानने को राजी नहीं थे। अपनी तमाम समस्याएं बता रहे थे तो हल न होने तक हड़ताल की चेतावनी दे रहे थे। अस्पताल प्रशासन परेशान था कि उनपर किस तरह से कार्रवाई की जाए, क्योंकि वह सभी आउटसोर्सिग कंपनी से काम पर लगाए गए थे। ऐसे में चौथे दिन अस्पताल प्रशासन ने एक्शन लेते हुए जब उनपर कार्रवाई की तो वे सुबह से ही अपने काम पर लग गए।

आउटसोर्सिग कंपनी से अस्पताल में साफ-सफाई के लिए कर्मचारी लगाए गए हैं। तीन दिन से वह सभी कार्य बाधित कर रहे थे। चार कर्मचारियों को निकाल दिया गया बाकी 44 का तीन दिन का वेतन काटा है। सभी कर्मचारी अब काम पर लौट आए हैं। आउटसोर्सिग कंपनी को भी चेतावनी दी गई है। - पूजा चौहान, हेल्थ मैनेजर जिला अस्पताल

खटेटा में मिले फाल्सीपेरम मलेरिया के 12 मरीज

ब्लाक मझगवां के ग्राम खटेटा में पिछले दिनों हुई चार मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूट गई। गुरुवार को स्वास्थ्य टीम ने खटेटा में मेडिकल कैंप लगाया, जिसमें लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। दवा बांटी। इस दौरान जांच में लगभग दो दर्जन से ज्यादा मरीज मलेरिया के निकले। इनमें से एक दर्जन रोगियों में फाल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि हुई। डॉ. पारस गुप्ता ने बताया कि सभी को दवाइयां वितरित कर दी गई हैं। मलेरिया का प्रमुख कारण गांव में सफाई व्यवस्था ठीक न होना है। गंदगी से मच्छर पनप रहे हैं। बीमारी फैल रही है। सफाई रखने व कीटनाशक का छिड़काव कराने की बात कही। पूरे क्षेत्र में बुखार पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खटेटा के अलावा ग्राम मुगलपुर, बड़ागांव, गुलड़िया, कतुरोई, वसंतपुर व मोहरसिंह गौटिया में सैकड़ों लोग बुखार की चपेट में हैं।

बच्चे की मौत पर जिम्मेदार झोलाछाप पर एफआइआर 

आंवला कोतवाली क्षेत्र के गांव मऊ चांदपुर में झोलाछाप के इलाज से बच्चे की मौत के मामले में सीएमओ के निर्देश पर झोलाछाप के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई गई है।

गांव के झोलाछाप धर्मेंद्र की दुकान पर आलमपुर कोट के रहने वाले अनेकपाल अपने आठ महीने के बच्चे को दवाई दिलवाने गए थे। आरोपित ने इलाज शुरू किया तो बुधवार को बच्चे की हालत बिगड़ गई। झोलाछाप ने बच्चे की हालत बिगड़ने पर हाथ खड़े कर लिए। परिजन बच्चे को लेकर रामनगर जा रहे थे कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद मृतक के परिजनों ने झोलाछाप पर बच्चे की मौत का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामला सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला तक पहुंचा तो उन्होंने जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। गुरुवार को जांच टीम ने झोलाछाप धर्मेंद्र को दोषी मानते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इस बारे में सीएमओ ने बताया कि पहले भी टीम ने झोलाछाप के यहां छापा मारा था तो वह दुकान से भाग गया था। जांच में दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई गई है।

Posted By: Abhishek Pandey

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