बरेली, नरेंद्र यादव। Hallmark Law News : सूबे की राजधानी लखनऊ से लेकर आर्थिक राजधानी कानपुर समेत दर्जन भर से अधिक जनपदों तक सराफा कारोबार से स्वर्णिम चमक बिखेरने वाला शाहजहांपुर हालमार्किंग कानून लागू होने के बाद बदलाव के लिए तैयार हो गया है। सराफा कारोबारियों ने 200 साल पुरानी "विश्वास ही परंपरा" के स्लोगन को अब "गुणवत्ता ही पहचान" से ख्यातिलब्ध बनाने का संकल्प ले लिया है। इसके लिए जनपद में तीन हालमार्किंग सेंटर भी खुल गए है। जो आभूषणों में सोने की मात्रा का परीक्षण कर भारत मानक ब्यूरों से निर्गत छह अंकों की एचयूआइडी (हॉलमार्क यूनिट आइडेंटिटी) मुहर से विश्वस्तरीय साख में याेगदान करने लगे है।

वर्ष 1647 में मुगल शासक शाहजहां के नाम से शाहजहांपुर आस्तित्व में आया। अफगानिस्तान से जई, खेल नाम की जातियों के लोग लाकर बसाए गए। साथ में सोने चांदी के आभूषकों का काम करने वाले खत्री समाज के लोगों को लाकर यहां चौक क्षेत्र में बसाया। 19वीं सदी में जनपद के आभूषणों का कारोबार संयुक्त प्रांत में फैल गया। आजादी के बाद सोने की चमक में और निखार आया।

सोने से सियासत में भी चमका शाहजहांपुर

सराफा कारोबार में लाला काशीनाथ सेठ परिवार का मुख्य नाम रहा। इसी परिवार के विशन चंद्र सेठ ने 1957 में डबल सीट होने पर एटा, शाहजहापुर क्षेत्र से संसद में प्रतिनिधित्व किया। देश की राजधानी लखनऊ से लेकर कानपुर, गोरखपुर, बाराबंकी समेत पड़ोसी जनपद हरदोई, बरेली, लखीमपुर, सीतापुर, पीलीभीत आदि जनपदों के लिए शाहजहापुर का सराफा बाजार खरीद बिक्री का मुख्य केंद्र रहा।

80 फीसद डाई, 20 फीसद तारों से होता कार्य

सोने के आभूषण मुख्य रूप से अंबेास व विजिल वर्क से तैयार होते है। अंबोस में डाई का प्रयोग करके अाभूषणों को ढाला जाता है, जबकि विजिल वर्क में तारों से जेवर बनाए जाते। तमाम आभूषणों मे दोनों विधियों का प्रयोग किया जाता है। जनपद में करीब 80 फीसद आभूषण अंबोस पद्धति से तैयार होते हैं।

15 हजार लोगाें को सराफा कारोबार से मिलता रोजगार

जनपद में करीब 50 सोने चांदी के थोक विक्रेता व 950 फुटकर आभूषण विक्रेता है। एक प्रतिष्ठान से औसतन करीब 15 लोगों को रोजगार मिलता है। इनमें सोने, चांदी की गलाई, डाई कटाई, छिलाई, उजाल समेत करीब दस तरह के कार्य करने वाले लोग शामिल रहते हैं। एक कुशल कारीगर करीब दो हजार की दैनिक कमाई कर लेता है।

इस तरह लगती है हॉलमार्किंग सेंटर पर शुद्धता की मुहर

जनपद में गंगा हॉलमार्किंग, एवन हॉलमार्किंग तथा बांके बिहारी नाम से हालमार्किंग सेंटर है। इन सेंटर पर आभूषणों की 40 लाट में एक नग काे गलाकर उसकी शुद्धता को परखा जाता है। इसके बाद बीआइस पोर्टल की मदद से छह अंकों का हालमार्क यूनिक आइडी नंबर आवंटित होगा। यूएचआइडी को स्कैन करने पर संबंधित आभूषण के उत्पादक, विक्रेता व प्रयोगशाला का विवरण आ जाएगा।

प्रत्येक नग की हालमार्किंग के लिए शुल्क निर्धारित

प्रत्येक आभूषण पर हॉलमार्किंग के लिए प्रयोगशाला संचालक को जीएसटी समेत 41 रुपये शुल्क मिलेगा। माल गलाकर सोने की मात्रा आंकलन करने पर प्रति नग 250 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

यह होंगे हालमार्क कानून के फायदे

- कैरेट अनुसार शुद्धता प्रमाणित होने पर ग्राहकों को आभूषण का पूरा मूल्य मिलेगा।

- ग्राहकों को ठगा नहीं जा सकेगी। पूरे देश में समान कीमत मिलेगी।

- सोने की शुद्धता पर थर्ड पार्टी की गारंटी होगी।

यह होगी असुविधा

- हालमार्किेंग सेंटर पर एक दिन में 200 तक ही आभूषणों को एचयूआइडी दिया जा सकता है।

- शहर के 3 सेंटरों पर प्रतिदिन 600 से 700 तक ही है एचयूआडी संभव होगी। जबकि जनपद में करीब 1000 प्रतिष्ठान हैं।

- हॉलमार्किंग सेंटर पर सामान भेजने के उपरांत 8 से 10 दिन के उपरांत तैयार माल मिल पा रहा है।

हॉलमार्क कानून लगाए जाने के बाद ज्वैलर्स को काफी लिखा पढ़ी करनी होगी। आभूषणों के सभी नगाें का विवरण रखना होगा। सामान्यतया अच्छे प्रतिष्ठानों पर 15 हजार तक आभूषण पीस के हो सकते हैं। ऐसे में सभी को भारत मानक ब्यूराें के पोर्टल पर फीड करने में बड़ी दिक्कत आएगी। लेकिन उत्पाद की विश्वस्तरीय विश्वनीयता बढ़ेगी। ग्राहकों को कैरेट के अनुसार आभूषण का पूरा मूल्य मिलेगा। विनोद सर्राफ यूपी डायरेक्टर इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन एवं अध्यक्ष सर्राफा सदरबाजार एसोसिएशन

हाॅलमार्किंग सेंटर पर पारदर्शी परीक्षण व्यवस्था है। एचयूआइडी नंबर से कोई भी व्यक्ति आभूषण के उत्पादक, बिक्रेता तथा प्रयोगशाला की जानकारी की जा सकेगी। हॉलमार्किग के लिए बीआइएस में पंजीयन जरूरी है। राजकुमार रस्तोगी गंगा हॉलमार्किंग सेंटर

- हॉलमार्किग कानून अच्छा है। इससे ग्राहकों का हित सुरक्षित होगा। लेकिन सरकार को प्रकि्रया का सरलीकरण करना चाहिए। कारोबारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें दक्ष बनाना चाहिए। कानून को व्यावहारिक बनाने का प्रयास होने चाहिए।राजनरायण रस्तोगी, अध्यक्ष, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन

फैक्ट फाइल

- 75 फीसद सोने की मात्रा निर्धारित है 8 कैरेट के लिए

 - 91.6 फीसद सोना होता है 22 कैरेट में

- 24 कैरेट के नहीं बनते आभूषण, बिस्किट के रूप में बिकता गोल्ड

 

Edited By: Ravi Mishra