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Garbyang Village: 10,500 फीट की ऊंचाई पर चीन सीमा का वीरान गांव फिर हुआ आबाद, भारतीय सेना ने उठाया बड़ा कदम

Published: Sun, 20 Sep 2026 06:00 AM (IST)

Garbyang Village: सेना ने चीन सीमा पर स्थित 10,500 फीट ऊंचे गर्ब्यांग गांव को पुनर्जीवित किया है, जहां बुनियादी सुविधाएं ...और पढ़ें

गर्ब्यांग गांव में जीओसी उत्तर भारत लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा एवीएसएम, का तिलक लगाकर अभिनंदन करतीं ग्रामीण। सौ. सेना

गर्ब्यांग गांव में जीओसी उत्तर भारत लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा एवीएसएम, का तिलक लगाकर अभिनंदन करतीं ग्रामीण। सौ. सेना

HighLights

  1. दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं मिलीं तो लौटी रौनक और सांस्कृतिक विरासत

  2. पूर्व में गांव में पलायन के कारण रह गए थे सिर्फ 80 परिवार, अब संख्या हो गई 220

नीलेश प्रताप सिंह, बरेली। समुद्र तल से 10,500 फीट ऊंचाई पर गर्ब्यांग गांव, जिसके दूसरी ओर चीन है...। वहां जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि देश-संस्कृति के लिए जिया जाता है। पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) का यह गांव विषम परिस्थितियों में डगमगाया तो थल सेना ने छाती से लगा लिया। चार वर्षों में सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल या स्कूल...वो सब उपलब्ध करा दिया, जिसकी जरूरत थी।

कुछ वर्ष पहले पलायन के कारण सिर्फ 80 घरों में सिमट चुके इस गांव में अब 220 परिवार हैं। सेना ने उन्हें स्वरोजगार के अवसर भी दिए हैं, ताकि अपनी माटी में रहकर देश के प्रहरी भी बने रहें।

Garbyang Village: सीमांत गांवों में सेना रिवर्स माइग्रेशन व आपरेशन सद्भावना संचालित करती है। इसके अंतर्गत बरेली स्थित उत्तर भारत मुख्यालय के अफसरों ने गर्ब्यांग गांव को भी चुना, क्योंकि ग्रामीण पलायन करते जा रहे थे।

Garbyang Village पर्यटन व रोजगार को बढ़ावा देने के लिए गर्ब्यांग में सेना की ओर से बनाया गया टेंट आधारित होमस्टे। सौ. सेना(1)

सेना ने बुनियादी सुविधाएं देकर उन लोगों से वापस आने की अपील की, जो पैतृक भूमि छोड़कर पिथौरागढ़, हल्द्वानी, सितारगंज आदि में रहने को विवश हो गए थे। इस पहल का क्या प्रभाव पड़ा ? इसका जवाब ग्राम सरपंच कृष्णा गर्ब्याल गौरवान्वित होकर देते हैं।

फोन पर चार मिनट की बातचीत में उन्होंने सेना के प्रयास बताए, कि अब गांव में अस्पताल है, सौर ऊर्जा वाली लाइटों से आबादी में जगमग है। सांस्कृतिक आयोजन सामुदायिक केंद्र में होते हैं। बच्चे प्राइमरी स्कूल में पढ़ने जाते हैं।

Garbyang Village गर्ब्यांग गांव में शनिवार को धार्मिंग आयोजन के दौरान जुटे ग्रामीण। सौ. सरपंच (2)

सात किमी पर पड़ोसी गांव गुंजी तक पहले रास्ता नहीं था, अब सड़क बना दी गई है। बीएसएनएल का नेटवर्क होने से मोबाइल फोन काम करते हैं। उनसे पूछा कि ग्रामीण लौटने लगे, मगर जीवन-यापन का माध्यम क्या होगा?

इस पर कहा कि सेना ने पालीहाउस बनाए हैं, ताकि कृषि हो सके। समय-समय पर भेड़, बकरी आदि पशु भी उपलब्ध कराए जाते हैं। तंबू-आधारित होमस्टे बनाकर दिए गए हैं।

Garbyang Village पिथौरागढ़ के गर्ब्यांग गांव में सेना की ओर से बनाया गया पाली हाउस। सौ. सरपंच (3)

Bareilly News: इससे पर्यटकों को रुकने का स्थान मिल रहा और उनसे मिलने वाले शुल्क से ग्राम समिति की आय हो रही है। गांव में आदि कैलाश यात्रियों का पड़ाव होने से पर्यटक रुकते हैं। यह ओम पर्वत जाने का रास्ता भी है।

उत्तर भारत मुख्यालय के सैन्य अफसर फिर आबाद हो रहे गांव की रौनक पर प्रसन्नता जताते हैं। शनिवार को उन्होंने कहा कि पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से गांव में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यालय की टीम निरंतर गांव में प्रवास करती है।

गांव के बारे में

वर्ष 1962 में चीन युद्ध से पहले यह गांव भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का बड़ा डिपो था। यहां के व्यापारी तिब्बत से ऊन, सुहागा, नमक और घोड़ों का व्यापार करते थे।

ब्रिटिश काल में प्राकृतिक खूबसूरती, अनूठी वास्तुकला के कारण अंग्रेजों ने इसे मिनी यूरोप या छोटा विलायत का दर्जा दिया था। पूर्व में भूमि व पहाड़ दरकने, परिवहन, पानी, चिकित्सा आदि समस्याओं के कारण ग्रामीण पलायन करने लगे थे। सेना अब सभी को वापस आने के अवसर तैयार कर रही है।

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