AI के दौर में किताबों पर फिदा हुई Gen-Z, बरेली के बुक फेयर में लगी युवाओं की भारी भीड़
बरेली के सिटी सेंटर एलए मॉल में लगे पुस्तक मेले में जेन-जी (युवा) की भारी भीड़ उमड़ रही है, जो ...और पढ़ें

बरेली में आयोजित पुस्तक मेले में मौजूद युवक और युवतियां जागरण
HighLights
मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धक पुस्तकों की कर रही खरीदारी
जागरण संवाददाता, बरेली। इंटरनेट मीडिया और एआइ के दौर में स्मार्टफोन के प्रति युवाओं की रुचि अधिक है... अक्सर यह वाक्य सुनने को मिलता है, लेकिन सिटी सेंटर एलए माल में लगा पुस्तक का मेला इस धारणा को तोड़ रहा है। यहां सबसे अधिक आकर्षण जेन-जी यानी युवा पाठकों का देखने को मिल रहा है, जो मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धक पुस्तकों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
वे अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की आत्मकथा 'अनफिनिश्ड' पसंद कर रहे और माइथोलाजिकल फिक्शन में अमीश त्रिपाठी की द ओथ आफ द वायुपुत्राज और द सीक्रेट आफ द नागाज युवाओं को भी।
कमाल की बात यह है कि वहां एक कोने में पड़ी कुर्सियों पर बैठे कई युवा किताबों की दुनिया में खोए से नजर आते हैं। 20 सितंबर तक सुुबह 11 से रात 10 बजे तक चलने वाले किताब लवर्स के मेले में बड़ी संख्या में कालेज और स्कूल के विद्यार्थी भी पहुंच रहे हैं।
कई शिक्षण संस्थानों ने विद्यार्थियों को बसों से मेले तक भेजने की पहल की है, ताकि उनमें पढ़ने की आदत विकसित हो सके। लेखक दिव्य प्रकाश दुबे की चर्चित किताबें मुसाफिर कैफे, अक्टूबर जंक्शन, इब्नेबतूती भी युवाओं को भा रही हैं।
जीवनी, आत्मकथा, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत, इतिहास जैसी विधाओं की पुस्तकों की अच्छी बिक्री हो रही है। हिंदी साहित्य में विनोद कुमार शुक्ल का उपन्यास दीवार में खिड़की रहती थी तथा समीर मोहन पाठक की जमीर का कैदी भी पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इनके अतिरिक्त भी बच्चे समेत सभी वर्गों के लोग अपने विषय, फिक्शन और नान फिक्शन किताबें खरीद रहे हैं।
खरीदारी करने पहुंचे, बन गए पाठक
डिजिटल युग में ऐसी पहल युवाओं की एकाग्रता, भाषा कौशल और आलोचनात्मक सोच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यही कारण है कि यह पुस्तक मेला अब मनोरंजन से आगे बढ़कर शिक्षा और पाठन संस्कृति का उत्सव बनता दिखाई दे रहा है।
युवा आयोजक राहुल पांडे के अनुसार, यह मेला केवल किताबों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास है। माल में खरीदारी के लिए आने वाले अनेक लोग अचानक पुस्तक स्टाल पर रुककर किताबें पलटते हैं और फिर पाठक बनकर लौटते हैं।
सोशल मीडिया से थोड़ा ब्रेक लेकर किताबें पढ़ना सुकून देता है। इस मेले से मैंने दो मोटिवेशनल किताबें खरीदी हैं। - कौशल कुमार
एआई जानकारी दे सकता है, लेकिन किताबें सोचने और समझने का नजरिया देती हैं। इसलिए मुझे नाॅन फिक्शन अधिक पसंद हैं। - साक्षी
नाॅन-फिक्शन किताबें तथ्यों पर आधारित होती हैं। मैं अपनी सहपाठी के साथ आई हूं, पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें भी देखी हैं। - जसमीत कौर
मोबाइल पर घंटों बिताने से बेहतर है कि अच्छी किताब पढ़ी जाए। मैंने अमेरिका से जुड़ी किताबों को देखा, जो काफी अच्छी लगी। - मोसेस
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