जेएनएन, बरेली : अधिग्रहण के बाद सरकारी हाथों में गई देवचरा के 41 किसानों की जमीन 25 साल बाद फिर उन्हें गले लगाएगी। यह जमीन मंडी स्थापना के लिए अधिग्रहीत की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जमीन वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग ज्यादातर किसानों को दी गई मुआवजा राशि वापस ले चुका है। यह रकम मंडी परिषद के सुपुर्द होगी।

1994 में शुरू की थी अधिग्रहण की प्रक्रिया 

मंडी समिति ने 1994 में अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। मुआवजे के लिए एक करोड़ 60 लाख रुपये मंडी समिति ने विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग को दिए थे। 41 किसानों की जमीन गई थी। इनमें से 21 ने ही मुआवजा का पैसा ले लिया था, बाकी अधिग्रहण के विरोध में रहे। मंडी परिषद ने कब्जा लेकर बाउंड्री बना ली। इसके विरोध में किसान हाईकोर्ट चले गए। वहां से किसानों के पक्ष में फैसला हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहण को दिया अमान्य करार

मंडी समिति सुप्रीम कोर्ट चली गई। 2018 के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहण को अमान्य करार देकर निरस्त कर दिया। इसके चलते किसानों को जमीन वापस मिल पा रही है। अधिकारियों का कहना है कि 78 लाख रुपये 19 किसानों से वापस लिया जा चुका है। बाकी पैसा भी जल्द वसूल लिया जाएगा। इसके बाद जमीन का नामांतरण फिर किसानों के नाम कर दिया जाएगा।

अधिग्रहण के एवज में किसानों को दिया गया ज्यादातर मुआवजा वापस ले लिया गया है। यह रकम मंडी समिति को वापस की जाएगी। -मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट

Posted By: Abhishek Pandey

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