एथेनॉल इंडस्ट्री ने रुहेलखंड के मक्का किसानों को दिया बड़ा बाजार, आय में होगी बढ़ोतरी
रुहेलखंड मंडल में एथेनॉल उद्योग के कारण मक्का किसानों का रुझान बढ़ा है, जिससे उन्हें बड़ा बाजार और बेहतर आय मिल रही है।
-1792502987540_m.webp)
एआई जनरेटेड तस्वीर।
HighLights
एथेनॉल उद्योग ने मक्का किसानों को दिया बड़ा बाजार।
बदायूं में मक्का का रकबा बढ़कर 80 हजार हेक्टेयर पहुंचा।
सरकारी क्रय केंद्रों पर मक्का की खरीद 2225 रुपये प्रति क्विंटल।
जागरण संवाददाता, बरेली। रुहेलखंड मंडल में मक्का उत्पादन के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। वजह, एथेनॉल उद्योग ने मक्का किसानों को बड़ा बाजार उपलब्ध करा दिया है। धान और गेहूं की तरह समर्थन मूल्य पर मक्का की खरीद भी हो रही है और एथेनॉल बनाने वाली कंपनियां सीधे किसानों से संपर्क कर रही हैं।
एथेनॉल उत्पादन के अलावा पशु आहार में भी मक्का की खपत बढ़ी है। भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान की ओर से मक्का किसानों और एथेनॉल उत्पादकों के बीच समन्वय बनाने के लिए योजना चलाई जा रही है। मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार धान और गेहूं की तरह मक्का का समर्थन मूल्य घोषित कर सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद कर रही है।
मंडल में सबसे ज्यादा बदायूं जिले में मक्का की खेती की जा रही है। पिछले साल 50 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती की गई थी, जबकि इस साल रकबा बढ़कर 80 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया। सरकार ने यहां सात क्रय केंद्र खोलकर 2,225 रुपये क्विंटल की दर से मक्का की खरीद कर रही है।
बदायूं में मक्का उत्पादन को बढ़ावा मिलने की मुख्य वजह यह है कि यहां रेलवे ने मालगाड़ी के लदान का केंद्र बना रखा है। व्यापारी किसानों से मक्का खरीद कर रेलवे के माध्यम से दूसरे प्रदेशों तक निर्यात कर रहे हैं। बरेली जिले में मक्का उत्पादन की बात करें तो 946 हेक्टेयर में ही मक्का की खेती की गई है।
भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को रकबा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विज्ञानी डा. अरविंद तेतरवाल, डा. रामनिवास गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को समझा रहे हैं कि एथेनॉल उद्योग में मक्का किसानों के लिए नया बड़ा बाजार मिल रहा है।
आधुनिक कृषि तकनीकों से मक्का उत्पादन बढ़ाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। संयुक्त कृषि निदेशक दुर्विजय सिंह का कहना है कि मक्का के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। उम्मीद की जा रही है कि आगामी वर्षों में बदायूं की तरह बरेली में भी रकबा बढ़ेगा।
