जेएनएन, बरेली : आंवला नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने नियम को ताक पर रखकर डेढ़ साल पहले शासन को चूना लगाया। बोर्ड को भी गुमराह किया। बीच में उन्हें निलंबित भी किया गया। अब डेढ़ साल बाद जाकर उन पर शिकंजा कसा है। शासन ने नौ आरोपों को लेकर उनके खिलाफ आरोप पत्र दिया है। 

आंवला नगर पालिका में राजेश सक्सेना अगस्त 2017 से लेकर 26 अप्रैल 2018 तक अधिशासी अधिकारी रहे। उन पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप है। पालिका में खरीद के साथ पदोन्नति में मनमाने ढंग से कार्रवाई की। बोर्ड बैठक में जब उनसे कहा गया कि वह खरीद की पत्रावली पेश करें तो वह सिर्फ एक लेकर पहुंचे और बीच में ही बैठक छोड़ कर चले भी गए थे। सफाई कर्मी सुनील कुमार के बारे में बताया गया कि उसे सफाई में नहीं लगाया गया। जबकि मस्टररोल में उसका नाम अंकित पाया गया।

सफाई कर्मी अजय कुमार नौ साल तक अनुपस्थित रहा, पालिका प्रशासन को अवगत ही नहीं कराया। उसे बहाल करने से पहले उच्च स्तर से अनुमोदन नहीं लिया गया। शौचालय की गुणवत्ता खराब पाई गई तो स्ट्रीट लाइटें लगी हीं नहीं जबकि भुगतान सबका कर दिया गया। इतना ही नहीं आपूर्ति सामग्री का स्टॉक रजिस्टर भी नहीं प्रस्तुत किया गया।  सामग्री खरीद में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

खास बात यह है कि दीपक कुमार और पंकज चंद्रा की पदोन्नति भी बिना प्रक्रिया का पालन किए ही कर दी गई। अब जाकर इन आरोपों पर अधिशासी अधिकारी से 15 दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया है। मामले की जांच के लिए स्थानीय निकाय निदेशालय के मुख्य अभियंता को नियुक्त किया है। उन्हें पूर्व में निलंबित भी किया जा चुका है। अब राजेश सक्सेना आंवला में ही तैनात हैैं। हालांकि शनिवार शाम जब उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं लगा। 

Posted By: Abhishek Pandey

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस