बरेली, जेएनएन। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के साथ ही अभिभावकों को खाद्यान के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह 9 बजे से स्कूलों में छात्रों के साथ ही अभिभावकों की कतारें लगनी शुरू हो जा रही हैं। शिक्षकों द्वारा उन्हें राशन डीलर के लिए खाद्यान की पर्ची भी दी जा रही है। लेकिन, राशन डीलरों के पास पहुंचते ही अभिभावकों के हाथ सिर्फ मायूसी हाथ लग रही है। शिक्षकों का कहना है कि अभिभावकों को यह कहकर राशन डीलर लौटा रहे हैं कि फिलहाल राशन नहीं है। ऐसी स्थिति में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कोविड संक्रमण के चलते स्कूल बंद हैं। ऐसे में मध्यान्ह भोजन निधि से प्रतिदिन प्रति छात्र प्राथमिक वर्ग के लिए सौ ग्राम व उच्च प्राथमिक वर्ग के छात्रों के लिए 150 ग्राम राशन सरकार द्वारा दिया जा रह है। पिछले वर्ष भी संक्रमण के चलते स्कूल बंद रहे। ऐसे में सरकार ने बच्चों के लिए खाद्यान्न और कन्वर्जन लागत भेजने को निर्देशित किया। पिछले साल पहला कन्वर्जन शुल्क 76 दिनों के हिसाब से एमडीएम के खातों में पहुंचा। इसका सभी जगह खाद्यान्न वितरित हुआ।

इसके बाद जुलाई 2020 से अगस्त 2020 तक 49 दिन और सितंबर 2020 से फरवरी 2021 तक प्राथमिक का 138 दिन और उच्च प्राथमिक का 124 दिन का राशन की कन्वर्जन लागत भेजी गई। जुलाई से अगस्त तक 49 दिन की जो कन्वर्जन शुल्क भेजा गया उसे विभाग द्वारा समायोजित कर भेजा गया। जिसमें 60 फीसदी स्कूल में शून्य की स्थिति है। ऐसे अभिभावकों को कोटेदारों से राशन नहीं मिल पा रहा है। बिथरी ब्लाक के अध्यक्ष केसी पटेल ने कहा कि यदि स्कूल के लिए यही जानकारी मिल जाती कि किस माह में कितने बचत को समायोजित किया गया है, तो काफी जगह हमारे शिक्षक समस्या को हल करने का प्रयास करते। शिक्षक नेता जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार ने बताया इस समस्या हल करने के लिए गुरुवार को बीएसए से बात करेंगे।

Edited By: Samanvay Pandey