स्नेह और विश्वास में पगा परिपक्व रिश्ता
दैनिक जागरण बरेली ने शहर के विकास और सामाजिक सरोकारों में 37 वर्ष पूरे कर 38वें वर्ष में प्रवेश किया ...और पढ़ें

समाज को दीप्तिमान करने वाले सूरज की पहली किरण : 12 सितंबर 1989, दैनिक जागरण बरेली संस्करण का यह प्रथम अंक है। उस दिन से आज तक, अपने शहरवासियों ने दैनिक जागरण को सिर आंखों पर बैठाया। जागरण ने भी बरेली का अपना परिवार मानकर हर यात्रा में कंधे से कंधे मिलाया। एक-दूसरे के प्रति यह भरोसा पहले भी था, आज भी है और हमेशा रहेगा...। एक परिवार की अटूट रिश्ते की तरह। जागरण अर्काइव
पवन तिवारी, बरेली। चार दशक होने को हैं। बरेली के आंगन में होनहार शिशु की तरह उठते-संभलते चलना सीखते आपका दैनिक जागरण कैशोर्य तक आया और एक ओजस्वी, सकारात्मक परिवर्तन की छटपटाहट लिए युवा की तरह परिवार, समाज का सदस्य बन गया। बरेली के बदलाव का मुखर साक्षी, शहर के विकास का सहकर्मी, सहधर्मी जागरण आज 38वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
37 वर्ष के साथ का सुंदर अनुभव और उससे उत्पादित परिपक्वता के आभूषण से सुसज्जित। सामाजिक सरोकारों को लेकर और भी जागरूक। रूहेलखंड की माटी से और गहरे जुड़ाव के साथ।
परिवर्तन के साथ कदमताल करते हुए जागरण का वही तेवर, वही कलेवर बरकरार है ही, हम बढ़ती-चढ़ती बरेली के कुछ अधूरे सपने, शहर को और निखारने, संवारने का भावी संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे।
वर्ष 1989 की भोर में आज ही का दिवस था (12 सितंबर)। सूर्यदेव की लालिमा नभ से छिटककर धरती पर न्यारी छटा का सृजन कर रही थी। शहर अंगड़ाई लेते हुए नव प्रात के दर्शन के लिए आंखें खोल रहा था, तब आपकी देहरी पर जागरण ने दस्तक दी।
उन वर्षों में शहर को विकास की साध थी। उसे एक ऐसे मित्र की आवश्यकता थी, जो समावेशी दृष्टिकोण के साथ पूरे मनोयोग से उनके युद्ध का सारथी बन सके। पत्र ही नहीं, मित्र भी के ध्येय वाक्य के साथ बरेली की अपेक्षाओं पर जागरण खरा भी उतरा।
वर्ष 1981 से 1996 के बीच की पीढ़ी जेन वाइ (मिलेनियल्स) होती है। इस हिसाब से हम 1989 में यहां स्थापित हुए जागरण को मिलेनियल्स मानेंगे। यह पीढ़ी विशेषताओं से भरी है।
टीवी के नेटवर्क के लिए छतों पर एंटिना घुमाते बच्चे, डिश और केबल, इंटरनेट, कार्डलेस फोन, सेलफोन के की-पैड वर्जन के साथ स्मार्टफोन तक की यात्रा के साक्षी हैं।
इस पीढ़ी ने तकनीकी बदलाव के साथ ही सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के विविध आयाम देखे हैं। उनकी कार्यशैली सबसे अलग है। जीवन को लेकर उनका दृष्टिकोण भी भिन्न है। वे डूबकर काम करते हैं तो परिवार के साथ गुणवत्ता से भरा समय (क्वालिटी टाइम) भी व्यतीत करते हैं।
उन्हें अपने मूल्यों की चिंता है तो समाज से जुड़े मुद्दों के प्रति उनकी गहन संवेदना भी है। ठीक उसी तरह जागरण भी है। सुशिक्षित समाज, स्वस्थ समाज, नारी सशक्तीकरण, जल संरक्षण, गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण और जनसंख्या नियोजन के सात सामाजिक सरोकार लेकर आपके साथ अटूट विश्वास का रिश्ता स्थापित करते हुए।
पीढ़ियों ने जागरण को सुख-दुख में साथ खड़े देखा है। नई पीढ़ी भी जागरण से सन्नद्ध हो स्वयं को अभिव्यक्त करते हुए बरेली के सतत विकास के महाअभियान का अभिन्न अंग बन रही है।
कहते हैं कि समाचार पत्र वह होता है जो सज्जन के घर जाए तो उसे लगे कि हमारा मित्र आया है, दुर्जन के घर जाए तो उसे भय का आभास हो कि हमारा शत्रु आ गया। जागरण की कसौटी भी यही है। बरेली के विद्वतजन, हमें सदैव आपका आशीष मिलता रहे।
