बरेली, जेएनएन : तस्वीरें देखिए। ये शनिवार दोपहर की हैं। कुतुबखाना की अधिकतर दुकानें खाली पड़ी हैं, जबकि सड़कों पर ऐसी भीड़ है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा। बड़े बेफिक्री से ये लोग आवाजाही कर रहे। तब, जबकि कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बचाव के लिए हर किसी को भीड़ से दूर रहना चाहिए लेकिन यह लापरवाही खतरनाक स्थिति की ओर ले जा सकती है।

प्रशासन ने रोस्टर के अनुसार बाजार खुलने का मौका दिया है। मकसद था कि बाजार को कुछ गति मिल सके। फुटकर, थोक व उत्पादन इकाइयों की सप्लाई चेन ठीक हो गए। आमजन को जरूरत का सामान आसानी से मिल जाए और लोग ईद की तैयारी भी कर सकें। छूट के साथ निर्देश भी दिए गए थे कि बेहद जरूरी काम से ही बाहर निकलें और बचाव के इंतजाम रखें। बीते तीन दिन के हाल बयां कर रहे कि यह भीड़ कारोबार के लिहाज से बहुत मुफीद साबित नहीं हुई है। व्यापारियों का कहना है कि सड़कों पर भीड़ तो दिख रही मगर खरीदार बेहद कम हैं।

अब तक बीस फीसद भी बिक्री

व्यापारी बताते हैं कि रेडीमेड, कपड़ा और फुटवियर कारोबार को उम्मीद थी कि ईद पर खरीदार उमड़ेंगे। बाजार के हाल में कुछ सुधार आएगा। रोस्टर के हिसाब से दुकानें खुलीं तो अलग हालात नजर आए। रेडीमेड, कपड़ा व फुटवियर की उम्मीद से दस फीसद बिक्री भी अब तक नहीं हुई। थोक बाजार की बात करें तो बरेली से मंडल व उत्तराखंड तक माल भेजा जाता है। बार्डर पर सख्ती के कारण वहां के फुटकर दुकानदार नहीं पहुंच रहे। कपड़े के ऑर्डर फोन पर कम होते हैं, माल देखकर ज्यादा। रोस्टर के अनुसार, कपड़ों के साथ ही घड़ी-चश्मा व रिपेयरिग शॉप खुली थीं। वहां भी कम लोग ही पहुंचे।

लॉकडाउन का असर

लॉकडाउन में 56 दिन लोग पूरी तरह घर में रहे। किराना आदि आवश्यक वस्तुओं को छोड़ बाकी काम करने वालों के सामने आय का जरिया ठहर गया। व्यापारी अश्वनी आनंद कहते हैं कि लोगों की जेब में पैसा होता तो खरीदारी बढि़या होती। बाजार के हाल देखकर बहुत उम्मीद नहीं है।

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आज ये दुकानें खुलेंगी

म डिकल स्टोर, नमकीन, दालमोठ की दुकान, फल-सब्जी एवं दूध-दही, मछली, मीट, किराना स्टोर, कन्फैक्शनरी, मिठाई, कृषि यंत्र एवं कीटनाशक, खली, चूनी-चोकर, आटो मोबाइल, वर्कशाप, आटा चक्की, राशन की दुकान खुलेंगी।

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बाजार खुला है मगर दुकानें खाली हैं। लोग खर्च नहीं कर रहे, इसकी वजह दो महीने से काम बंद होना भी हो सकता है। थोक से फुटकर बाजार में बीस फीसद माल भी नहीं पहुंचा है।

-भरत कुमार, रेडीमेड कपड़ा कारोबारी

Posted By: Jagran

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