महंगाई में लगा सीएनजी का 'तड़का': 15 दिन में ₹10 बढ़े दाम, पेट्रोल को भी पीछे छोड़ा; ऑटो चालकों की बढ़ी मुसीबत
बरेली में सीएनजी की कीमतें 15 दिनों में ₹10 बढ़कर ₹109 प्रति किलो हो गई हैं, जो अब पेट्रोल से ...और पढ़ें

बरेली के सेटेलाइट स्थित सीएनजी पंप पर वाहन में सीएनजी भरवाते चालक। जागरण
HighLights
खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध को बताया जा रहा दाम बढ़ने का प्रमुख कारण
जागरण संवाददाता, बरेली। सीएनजी के दाम में लगातार हो रही वृद्धि से महंगाई और बढ़ने के आसार दिखने लगे हैं। सीएनजी को किफायती ईधन माना जाता था, लेकिन अब पेट्रोल से महंगी हो चुकी है। पिछले 15 दिन में जिले में सीएनजी का दाम 10 रुपये बढ़ोतरी के साथ 94 रुपये से बढ़कर 109 रुपये पहुंच चुका है। इसका दुष्प्रभाव माल-भाड़े, किराये पर भी पड़ सकता है।
सीएनजी महंगी होने की वजह खाड़ी में चल रहे युद्ध को बताया जा रहा है। सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव सीएनजी आटो चालकों पर पड़ा है, क्योंकि वह चाहकर भी किराया नहीं बढ़ा सकते, इलेक्ट्रिक वाहनों से उन्हें सीधी चुनौती मिल रही है।
तीन महीने पहले जून के मध्य तक सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) 96 रुपये किलो मिल रही थी। जून के अंत में 4.90 रुपये दाम बढ़ाया गया था, जिससे कीमत 100.90 रुपये किलो पहुंच गई थी।
हाल ही में फिर दाम बढ़ा दिए जाने से अब सीएनजी 109 रुपये किलो पहुंच चुकी है, जबकि पेट्रोल का दाम 101.78 रुपये लीटर है। सीएनजी अब पेट्रोल से महंगी हो चुकी है।
माइलेज में अंतर मान सकते हैं, एक लीटर पेट्रोल में कार 15 किमी तक दौड़ सकती है, वहीं सीएनजी से 25 किमी तक जा सकती है। सीएनजी के दाम बढ़ने का सीधा असर आटो चालकों पर पड़ा है।
उनकी कमाई तो नहीं बढ़ी है, लेकिन खर्च बढ़ गया है। अगर वह किराया बढ़ाते हैं तो इलेक्ट्रिक रिक्शा और इलेक्ट्रिक टेंपो से मिल रही प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे।
अब सीएनजी के बढ़ते दामों के कारणों की बात करते हैं। सीयूजीएल के वरिष्ठ प्रबंधक जितेंद्र गौतम बताते हैं कि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण सीएनजी के दाम बढ़ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर इसमें कुछ नहीं किया जा सकता। वह कहते हैं कि अब भी पेट्रोल के मुकाबले सीएनजी सस्ती है, क्योंकि पेट्रोल से जहां 15 किमी तक वाहन चला सकते हैं, वहीं सीएनजी से 25 किमी तक यात्रा कर सकते हैं।
ट्रांसपोर्टर जगदीश मलिक कहते हैं कि सीएनजी के दाम बढ़ने का व्यापक असर पड़ सकता है। खाद्य वस्तुओं की ढुलाई बढ़ने से इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं। इतना ही नहीं स्कूलों में संचालित किए जा रहे सीएनजी वाहनों का किराया भी बढ़ाया जा सकता है।
