बरेली, जेएनएन : भाजपा विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल जब भी बोलते हैं तो फिर पूरी रौ में बोलते ही चले जाते हैं। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। मौका था एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 'स्किल डेवलपमेंट इन इंडिया : चुनौती और अवसर' पर राष्ट्रीय सेमिनार का। बात हुनर पर हो रही थी। प्रोफेसरों के बाद विधायक को भी बोलने के लिए आमंत्रित किया गया। भारतीय हुनर का जिक्र करते हुए विधायक ने जो विधाएं बताई, उसे सुनकर कानून के जानकार और प्रोफेसर थोड़े असहज तो जरूर हुए मगर सभागार हंसी-ठहाकों से गूंज उठा।

विधायक पप्पू भरतौल ने स्किल पर अपनी बात रखते हुए कहा- 'चोरी करना और जेब काटना भी एक कला है। यह भी एक तरह का हुनर है जो सबके बस का काम नहीं।' अपनी युवावस्था में जेल के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया- 'मैंने कप्तान से कहा कि अगर कोई बंदी जेब काटकर यहां आया है तो वो भी बड़ी हिम्मत का काम है। मैंने कहा कि आपके पास कोई सिपाही, अधिकारी ऐसा है जो किसी की जेब काट सकता है..?' इस पर सभागार में ठहाके गूंज उठे। फिर विधायक बोले- 'मैंने कप्तान से कहा कि ये वो स्किल है जिसका कोई जोड़ नहीं।' उन्होंने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार भी वार किया। विधायक ने करीब पंद्रह मिनट तक अपनी बात रखी। इस दौरान हॉल ठहाकों से गूंजता रहा। युवा अफसरों के पास हर 15 मिनट में पत्नी का फोन विधायक ने कहा- 'जब भी कोई युवा अफसर हमसे मिलने आता है तो मैं देखता हूं कि हर 15 मिनट में सात बार उनकी पत्नी का फोन आ जाता है। पूछती हैं- कहां हो, कहां हो-कहां हो। यह है विश्वास की कमी है। अगर आपको विश्वास न हो तो मेरे ऑफिस आ जाइए। अधिकारी आएं तो खुद ही देख लेना..।' विधायक बोले- 'मैं तो अपने लड़के से भी कहता हूं कि तुम्हारी पत्नी ऐसी हो कि रात के दो भी बज जाएं तो फोन न आए..। '

मैं इस मंच के लायक नहीं

विधायक ने अपनी बात की शुरुआत में ही कहा कि आपने मुझे इस मंच पर बुलाया, यह मेरा सौभाग्य है। मैं इस मंच के लायक नहीं था। उन्होंने कहा कि हम तो सभी विभागों के चक्कर काटकर थक गए अब सबसे खराब विभाग (राजनीति) में आए हैं। बोले कि हम तो 14 साल की उम्र से ही सबसे आगे चलते आ रहे। चाहें वह खुराफात ही क्यों न हो। मैच भी हमने कभी ईमानदारी से नहीं जीता था।

शर्म छोड़ें, कोई काम छोटा नहीं

विधायक ने विद्यार्थियों को काम के लिए प्रेरित भी किया। कहा कि कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता। काम में शर्म न करें। सफलता की पहली शर्त यही है।

कुलपति बोले- मुगलों ने संस्कृति, अंग्रेजों ने मेधा नष्ट की

रुविवि के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने कहा कि मुगलों ने भारतीय संस्कृति और अंग्रेजों ने हमारी मेधा को नष्ट किया। हमें अपनी भाषा की किताबें पढ़ने की जरूरत है। तभी हमें सही ज्ञान और जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार सरकार के बजाय सामाजिक जिम्मेदार होनी चाहिए। कानुपर विवि की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने शोध कौशल को बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत जताई। मुख्य वक्ता एसके सूरी ने अपने विचार रखे।

देश में 2.2 फीसद लोग ही हुनरमंद

सेमिनार की आयोजन सचिव डॉ. अनीता त्यागी कहा कि देश की जनसंख्या की महज 2.2 फीसद आबादी ही कुशल है। कौशल विकास से इसे बढ़ाने की जरूरत है। कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम-टीईक्यूआइपी के जरिये हुआ। समन्वयक डॉ. मनोज कुमार, डॉ. अमित कुमार वर्मा, डॉ. अजय, प्रो. पीबी सिंह, डॉ. कमल किशोर, डॉ. मदन लाल आदि मौजूद रहे।

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