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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड में UCC लागू होने पर बरेलवी मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले, 'यूसीसी पर अमल करने में भी कोई ऐतराज नहीं...'

Published: Mon, 27 Jan 2025 01:10 PM (IST)

Bareilly News बरेलवी मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उत्तराखंड में लागू होने वाली समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अपनी प्रतिक्रिया दी ...और पढ़ें

Bareilly News: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
Bareilly News: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

जागरण संवाददाता, बरेली। Bareilly News: मुसलमान कानून पर अमल करता है और सम्मान करता है, यूसीसी पर अमल करने में भी कोई ऐतराज नहीं है। उत्तराखंड में लागू किए जाने वाले यूसीसी का अगर शरीयत से कोई टकराव नहीं हो और शरीयत के उसूलों के खिलाफ नहीं है तो मुसलमान यूसीसी पर अमल करेंगे। अगर शरीयत के खिलाफ या टकराव की स्थिति है तो मुसलमान यूसीसी पर अमल करने पर बाध्य और मजबूर नहीं हैं।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने यह बयान जारी किया है।

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भारत में हिंदुत्व के अलंबरदार बनना चाहते हैं और यूसीसी लागू किए जाने का फैसला उनका एकतरफा है।

सभी समुदायों से लेनी चाहिए राय

मौलाना ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सभी समुदायों से राय लेनी चाहिए थी। धामी की ओर से बनाई गई कमेटी ने सभी समुदाय से राय मशविरा नहीं लिया। खास तौर पर मुसलमानों से दूरी बनाए रखी गई, इसलिए ये फैसला एकतरफा है।

बरेलवी मौलाना की नसीहत, पहले मदरसों का इतिहास पढ़ लें धीरेंद्र शास्त्री

बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री के मदरसों को लेकर दिए बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने विरोध जताया। बरेलवी मौलाना ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री पहले मदरसों का इतिहास पढ़ लें कि देश की जंग ए आजादी में मदरसों का क्या योगदान रहा। मौलाना ने कहा कि आजादी के आंदोलन में देश में संचालित मदरसों के मौलवियों और छात्रों ने अपना योगदान दिया।

उत्तराखंड में लागू होने पर ये होंगे बदलाव

उत्तराखंड में सोमवार से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के साथ राज्य में बहुत कुछ बदलेगा। शादी का अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए ग्राम सभा स्तर पर रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी। किसी जाति, धर्म या संप्रदाय का व्यक्ति हो, उसके लिए तलाक का एक समान कानून होगा।

लड़कियों की शादी की उम्र चाहे वह किसी भी जाति-धर्म की हो, एक समान होगी। सभी धर्मों में बच्चों को गोद लेने का अधिकार मिलेगा। हालांकि, दूसरे धर्म के बच्चे को गोद नहीं लिया जा सकेगा। यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में हलाला जैसी प्रथा बंद हो जाएगी। बहुविवाह पर रोक होगी। उत्तराधिकार में लड़कियों को लड़कों के बराबर की हिस्सेदारी होगी।

लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य

लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना भी जोड़ों के लिए अनिवार्य होगा। इस दौरान पैदा होने वाले बच्चे को भी शादीशुदा जोड़े के बच्चे की तरह अधिकार मिलेगा। यूसीसी के नियम-कानून से अनुसूचित जनजाति को बाहर रखा गया है। ट्रांसजेंडर, पूजा-पद्धति व परंपराओं में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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