बरेली पर कूड़े का संकट: हर दिन निकल रहा 500 टन कचरा, दावों के बीच 5 साल से अटका सथरापुर प्लांट
बरेली में प्रतिदिन 500 टन कूड़ा निकल रहा है, जिसका निस्तारण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सथरापुर में 24.18 ...और पढ़ें

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HighLights
बाकरगंज में अब भी साढ़े तीन लाख टन से अधिक कूड़े का ढेर
सथरापुर में प्लांट शुरू करने के सिर्फ दावे, परेशान हो रहे शहरवासी
जागरण संवाददाता, बरेली। स्वच्छता में अव्वल आने का सपना हर वर्ष दिखाया जाता है, लेकिन कूड़े का निस्तारण नहीं होना इसे पूरा होने से रोक रहा है। कूड़ा निस्तारित नहीं होने से जहां शहर की छवि राष्ट्रीय स्तर पर सुधर नहीं पा रही, वहीं स्थानीय लोगों को यह समस्याओं में जकड़े हुए है। शहर से रोजाना करीब 500 टन कूड़ा निकल रहा है, लेकिन इसका रत्ती भर भी निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
बाकरगंज में पड़ा साढ़े तीन लाख टन कूड़ा शहर के माथे पर दाग जैसा बन गया है। सथरापुर में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू करने के पांच साल से सिर्फ दावे किए जा रहे हैं। इसके चलते कूड़ा निस्तारण चुनौती बना हुआ है।
शहर के 80 वार्डों से हर दिन 500 टन नया कूड़ा निकलता है, लेकिन इस कूडे़ के निस्तारण का कोई प्रबंध नहीं है। सारा कूड़ा बाकरगंज खड्ड में फेंका जा रहा है, जिससे वहां कूड़े के ऊंचे ढेर लगते जा रहे हैं।

वर्षों से कूड़ा फेंके जाने के कारण वहां साढ़े तीन लाख टन से अधिक कूड़ा इकट्ठा हो गया है। नगर निगम के जिम्मेदार वहां 1,700 टन प्रतिदिन लीगेसी (पुराना सड़ा कचरा) वेस्ट निस्तारित होने का दावा कर रहे हैं।
इस प्लांट की 500 टन प्रतिदिन क्षमता बढ़ाने की बात भी कही जा रही है, लेकिन ताजा कूड़ा निस्तारण की चुनौती को दूर नहीं कर पा रहे हैं।
निगम ने फरीदपुर रोड पर स्थित सथरापुर गांव में 24.18 करोड़ की लागत पांच लाख टन क्षमता का सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित कराया है। नगर निगम ने वर्ष 2021 में प्लांट स्थल का विकास कर एजेंसी चयन की प्रक्रिया आरंभ की।
पांच साल तक निविदाओं में उलझी परियोजना जनवरी 2026 में सातवीं बार निविदा प्रक्रिया के बाद दिल्ली की पाथ्या एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद मशीनें लगाई गईं, लेकिन कूड़ा निस्तारण की सिर्फ बातें ही की जा रही हैं।
बाकरगंज में अब भी पहुंच रहा कूड़ा, डोर-टू-डोर भी चुनौती
कूड़ा निस्तारण की शुरुआत घर से होती है। इसके लिए डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन निजी एजेंसियों की ओर से किया जा रहा है। व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगर निगम ने बीते दिनों नई सीएनजी कूड़ा गाड़ियां भी शामिल कीं।
इनमें गीले और सूखे कूड़े के लिए अलग चैंबर और मेडिकल वेस्ट के लिए अलग बाक्स की व्यवस्था बनाई गई। सथरापुर प्लांट का आरंभ न होने से बाकरगंज पर नया दबाव बना हुआ है। यहां हर दिन 500 टन नया कूड़ा पहुंच रहा है।
नियम बदले, कचरा पृथक्करण बना चुनौती
एक अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू कर स्रोत पर ही चार श्रेणियों-गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे में पृथक्करण अनिवार्य किया गया है।
गीले कूड़े को निकटतम सुविधा पर कंपोस्टिंग या बायोमीथेनेशन और सूखे कूड़े को मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तक पहुंचाने की व्यवस्था निर्धारित की गई है।
नियमों में 100 किलोग्राम प्रतिदिन या उससे अधिक कूड़ा पैदा करने वाले कई संस्थानों को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे संस्थानों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है।
इसके जरिए भविष्य की कूड़ा व्यवस्था सिर्फ नगर निगम के ट्रकों और प्लांट पर निर्भर नहीं रहने की बात कही जा रही है। बड़े होटल, अस्पताल, संस्थान, बाजार, आवासीय परिसरों आदि से निकलने वाले कूड़े के पृथक संग्रहण और स्थानीय प्रसंस्करण की निगरानी भी चुनौती बनी है।
शहर से निकलने वाले नए कूड़े का वैज्ञानिक प्रसंस्करण के जरिए निस्तारण किया जा रहा है। बाकरगंज के लीगेसी वेस्ट का समयबद्ध निस्तारण पर जोर है। सथरापुर सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के पर्यावरण से एनओसी समेत अन्य प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है, लीचेट ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जा रही है, उम्मीद है जल्द ही संचालन शुरू होगा।
- संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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