आखिरकार बरेली जिला अस्पताल में हुई स्वाइन फ्लू की पहली सरकारी जांच; ट्रूनाट टेस्ट में महिला निकली पॉजिटिव
बरेली जिला अस्पताल में पहली बार एक महिला मरीज की निश्शुल्क स्वाइन फ्लू जांच की गई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि ...और पढ़ें

जिला अस्पताल में महिला मरीज का सैंपल लेती स्वास्थ्य विभाग की टीम। सौ स्वास्थ्य विभाग
HighLights
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सैंपल लेकर ट्रूनाट मशीन से की जांच, मरीजों की संख्या हुई 20
जागरण संवाददाता, बरेली। आखिरकार जिला अस्पताल में शुक्रवार को पहली बार एक महिला मरीज की स्वाइन फ्लू की निश्शुल्क जांच की गई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई है। महिला को होम आइसोलेशन में रखा गया है। अब जिले में अब स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 20 हो गई है।
जिले में दो सप्ताह पहले स्वाइन फ्लू के एक साथ पांच मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद से लगातार निजी लैब की जांच में मरीज संक्रमित मिल रहे थे लेकिन जिला अस्पताल में जांचें नहीं की जा रही थीं।
दैनिक जागरण ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची एक महिला ने सांस लेने में तकलीफ की दिक्कत बताई।
उसने बताया कि उसने निजी लैब में जांच कराई थी, जिसमें उसमें संक्रमण के कुछ लक्षण बताए गए थे, यद्यपि उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, फिर भी टीम ने उसका ट्रूनाट किट से सैंपल लेकर जांच की तो संक्रमण की पुष्टि हुई।
22 वर्षीय महिला बिथरी चैनपुर में गोपाल नगरा, अनूप की रहने वाली है। महिला को दवाएं देने के साथ होम आइसोलेशन में रखा गया है। उसके संपर्क में आए स्वजन को भी दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
बुखार की जांच के इंतजार में जमीन पर बैठ रहे मरीज
स्वाइन फ्लू के साथ-साथ वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू के मरीज भी सामने आ रहे हैं। बुखार, खांसी, जुकाम के लक्षणों के साथ लोग जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डाक्टर मरीजों को जांचें लिख रहे हैं।
मगर, संख्या अधिक होने के कारण उन्हें बाहर गर्मी में टिनशेड के नीचे खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीज थककर जमीन पर बैठ और लेट जा रहे हैं। शुक्रवार को भी अस्पताल के पैथोलाजी के बाहर मरीजों की भीड़ जुटी रही।
75-80 भर्ती मरीजों की देखरेख का जिम्मा एक फिजीशियन पर
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना सैकड़ों मरीज आ रहे हैं। यहां एमबीबीएस और डीआरपी पर तैनात एमडी डाक्टर परामर्श दे रहे हैं, लेकिन नियमित वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. अजय मोहन अग्रवाल को रोजाना 75-80 भर्ती मरीजों का उपचार करना पड़ता है। इस कारण वह ओपीडी में कम समय दे पाते हैं। डाॅ. अग्रवाल ने बताया कि इस मौसम में बुखार, खांसी और गले में खराश के मरीज अधिक आ रहे हैं।
