कागजों में सिमटा बैन: नगर निगम के सामने ही खुलेआम बिक रही सिंगल यूज प्लास्टिक, 50 टन कचरा बढ़ा रहा टेंशन
बरेली में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जिससे बाजार में इसका धड़ल्ले से ...और पढ़ें

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HighLights
नगर निगम के सामने स्थित एलन क्लब सब्जी मंडी समेत अन्य बाजारों में धड़ल्ले से हो रही एसयूपी की खरीद-बिक्री
जुलाई-2022 से एसयूपी पर है प्रतिबंध, पर्यावरण के लिए खतरा बने प्लास्टिक के उपयोग को रोकने में निगम विफल
जागरण संवाददाता, बरेली। धरती को बंजर बना रही सिंगल यूज प्लास्टिक (एसयूपी) का उपयोग प्रतिबंध के बाद भी थम नहीं रहा है। बाजार में हर ओर इसका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। सर्वाधिक उपयोग छोटे दुकानदार से लेकर रेहड़ी-पटरी वाले कर रहे हैं। न उनमें प्रशासन का डर है और ही जुर्माने का।
विक्रेता मौके पर ही जाकर दुकानदारों को पालीथिन से लेकर स्ट्रा और गिलास आदि वस्तुएं उपलब्ध करा रहे हैं। लोगों को यह तो पता है कि सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित है, लेकिन विकल्पों के अभाव में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं, दुकानदार भी अधिक खर्च आने से लोगों को विकल्प देने से बच रहे हैं क्योंकि दूसरे दुकानदार उनको पालीथिन दे रहे हैं। ऐसे में वह भी प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक की खरीद-बिक्री कर रहे।
मंगलवार को जागरण टीम ने शहर के एलन क्लब सब्जी मंडी, श्यामगंज व अन्य क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक की पड़ताल की तो स्थिति चिंताजनक मिली। अधिकतर सब्जी व किराना दुकानदार बिना किसी डर के सिंगल यूज प्लास्टिक में सामान दे रहे हैं।
छोटी दुकानों के साथ मंडियों में सिंगल यूज प्लास्टिक पहले की तरह बिकने से पर्यावरण संरक्षण की बात बेमानी साबित हो रही। साथ ही नगर निगम की लापरवाह कार्यशैली से शासन के निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।
नगर निगम के 80 वार्डों से हर दिन 450 टन से अधिक कूड़ा निकलता है। इसमें हर दिन 50 टन से अधिक सिंगल यूज प्लास्टिक निकलता है। उल्लेखनीय है कि जुलाई-2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध है और इसका उपयोग करते पाए जाने पर पांच सौ से 50 हजार तक जुर्माने का प्रविधान है।
जागरूकता पर हर साल 25 लाख खर्च, फिर भी नहीं रुक रहा एसयूपी का उपयोग
नगर निगम की ओर से पर्यावरण संरक्षण को लेकर खुले में कूड़ा न फेंकने, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और स्वच्छ भारत मिशन के जरिए हर साल जागरुकता पर 25 लाख खर्च करता है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. भानु प्रकाश सिंह ने बताया कि, बाजार में आमजन फल, सब्जी, चाय व अन्य खाद्य पदार्थ सिंगल यूज प्लास्टिक में नहीं लें इसके लिए अभियान चलाकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर मंगलवार को बैठक कर समीक्षा भी की गई है।
सिंगल यूज प्लास्टिक के इन उत्पादों पर प्रतिबंध
गुब्बारे के लिए प्लास्टिक स्टिक, कैरी बैग, ईयर बड्स थर्माकोल (पालिस्ट्रीन), कैंडी स्टिक, आइस्क्रीम स्टीक, प्लास्टिक के झंडे, कप, प्लेट, गिलास, चम्मच, चाकू, स्ट्रा, मिठाई के डिब्बों पर लगी पन्नी, आमंत्रण कार्ड, सिगरेट के पैकेट प्रमुख उत्पाद हैं जिन पर प्रतिबंध लगाया है।
बाजार में भी उपलब्ध है सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प
पर्यावरण को बचाने के लिए अब आमजन की भूमिका सबसे अहम है। एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बाद बाजार में पर्यावरण के अनुकूल (बायोडिग्रेडेबल) थैले भी उपलब्ध हैं। व्यापारियों के अनुसार अधिकतर उपभोक्ता घर से बिना किसी बैग या थैला के खरीदारी को आते हैं।
कुछ उपभोक्ता ही थैला खरीदते हैं और अधिकतर लोग बचते हैं। ऐसी परिस्थिति में वह सिंगल यूज प्लास्टिक में ही सामान खरीदते हैं। कुछ दुकानदार आमजन को कागज व जूट के थैले में सामान लेने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
श्यामगंज में एकल उपयोग प्लास्टिक के स्थान पर पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं का व्यापार करने वाले राजेश कुमार कहते हैं कि एकल उपयोग प्लास्टिक 130 रुपये प्रतिकिलो में मिल रहा है, जबकि पर्यावरण के अनुकूल कागज व जूट के थैले 150 रुपये प्रतिकिलो मिल रहे हैं। दोनों की कीमतों में महज 20 रुपये का अंतर है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक की थैलियां, प्लेट, स्ट्रा, गिलास के अंदर जो रसायन होते हैं, उससे इंसान के साथ पर्यावरण पर काफी बुरा असर पड़ता है। मिट्टी में पड़े ये प्लास्टिक नाले-नालियों के जरिये तालाब-नदी में पहुंचते हैं, जो नुकसानदेह हैं।
सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग आमजन नहीं करें इसके लिए जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। दुकानदार इसे खरीद-बिक्री न करें इस पर सख्त अभियान चलाकर तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
- डाॅ. भानु प्रकाश सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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