बरेली दंगे का वो 'चक्रव्यूह' जिसमें फंस गए मौलाना तौकीर, 5 महीने बाद भी नहीं मिल पाई खुली हवा!
मौलाना तौकीर रजा ने 26 सितंबर 2025 को बरेली में उपद्रव कराया था, जिसके बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। ...और पढ़ें

दंगाइयों पर लाठी चार्ज करती पुलिस। जागरण आर्काइव
HighLights
26 सितंबर, 2025 को मौलाना तौकीर रजा ने शहर में कराया था उपद्रव, पुलिस ने सिखाया सबक
गुरुवार को उपद्रव के पांच माह हुए पूरे, सभी मुकदमों में लग चुकी है चार्जशीट, 92 लोग गए थे जेल
रजनेश सक्सेना, जागरण, बरेली। आए दिन लोगों को भड़का कर शहर में अशांति फैलाने वाला मौलाना तौकीर हर बार कार्रवाई से बच जाता था। उपद्रव के बाद पुलिस ने जब उसकी घेराबंदी की तो पांच माह बीतने के बाद भी उसे जमनात नहीं मिल सकी। कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने वाले मौलाना तौकीर को पुलिस ने ऐसा सबक सिखाया कि वह अभी तक फतेहगढ़ जेल से बाहर आने का इंतजार कर रहा है। अभी उसे जमानत कब तक मिलेगी यह किसी को नहीं पता।
26 सितंबर, 2025 को कानपुर के आइ लव मुहम्मद पोस्टर की आड़ में मौलाना ने शहर को आग में झोंकने का प्रयास किया था। उसने लोगों को भड़का कर शहर में उपद्रव कराया। पुलिस पर पथराव, फायरिंग, पेट्रोल बम और एसिड से हमला कराया। इस पूरे उपद्रव में 10 से अधिक पुलिसकर्मियों को चोट भी लगी थी।
दंगाइयों ने कुछ दुकानों और वाहनों में भी तोड़फोड़ की और आग के हवाले करने का प्रयास किया था। पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। इस दंगे की शुरूआत मौलाना ने खलील तिराहे से कराई और वह धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते श्यामगंज, किला, कैंट, प्रेमनगर आदि क्षेत्रों में भी पहुंच गया।
पुलिस ने उपद्रवियों पर कंट्रोल पाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, इससे भी वह नहीं रुके तो पुलिस ने लाठी चार्ज की। मामले को बिगड़ता और लोगों की उग्रता को देखते हुए एसएसपी अनुराग आर्य खुद फील्ड में उतर गए। श्यामगंज में उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए उन्होंने मोर्चा संभाला...। एसएसपी के लाठीचार्ज करते हुए सभी दंगाई भाग गए। मामले में पुलिस ने शहर के पांच थानों में 10 मुकदमे पंजीकृत किए।
इसमें मौलाना तौकीर रजा समेत 92 उपद्रवियों को जेल भेजा गया। इन मुकदमों की विवेचना अभी भी प्रचलित हैं। बाकी सभी मुकदमों में पार्ट चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हालांकि, कुछ दंगाइयों को स्थानीय कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। बाकी उपद्रव के मुख्य सभी आरोपित अभी भी अपनी जमानत का इंतजार कर रहे हैं मगर कोर्ट हर बार उनकी अर्जी खारिज कर देता है।
पुलिस के एक्शन के बाद लोगों ने की थी सराहना
उपद्रवियों पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर शहर को जलने से बचाया तो बरेली के लोगों में खुशी की लहर थी। उन्होंने एसएसपी अनुराग आर्य और बरेली पुलिस की सराहना करते हुए इंटरनेट मीडिया पर तमाम पोस्ट लिख डालीं।
स्थिति यह थी कि हर कोई बरेली पुलिस के एक्शन को बहुत अच्छा और सराहनीय बता रहा था। कुछ लोगों ने तो यहां तक लिखा कि यदि पुलिस सही समय पर एक्शन नहीं लेती तो बरेली 2010 की तरफ फिर से जलती।
मुख्यमंत्री भी बरेली पुलिस की करते हैं सराहना
बरेली पुलिस की कार्रवाई इतनी बेहतर हुई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई स्थानों पर यहां की कार्रवाई का जिक्र किया। उपद्रव के एक माह बाद मुख्यमंत्री एक कार्यक्रम में पहुंचे थे।
वहां उन्होंने कहा था कि दंगा करने और कानून को अपने हाथ में लेने वालों का क्या होता है..? यह बरेली के मौलाना और दंगा करने वाले दंगाइयों से पूछो। इसके अलावा भी उन्होंने बरेली पुलिस की कार्रवाई का जिक्र कई स्थानों पर किया था।
एसएसपी को मुख्यमंत्री ने किया सम्मनित
उपद्रव के बाद 28 दिसंबर को लखनऊ में हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसएसपी अनुराग आर्य को उनके बेहतर कार्य के लिए उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित भी किया था। बरेली में आने के बाद उन्होंने सिर्फ माैलाना तौकीर को ही नहीं बल्कि अन्य अपराधियों को भी बेहतर सबक सिखाया था।
