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बरेली में PWD का बड़ा घपला: बिना नौकरी 16 लोगों के खाते में भेजे 1.28 करोड़, फिर ऐसे वापस आए 70 लाख

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:58 PM (IST)

बरेली पीडब्ल्यूडी में 1.28 करोड़ रुपये के फर्जी भुगतान मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए एसएसपी से अनुमति मांगी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पीडब्ल्यूडी के शिकायती पत्र पर प्राथमिकी के लिए सीओ को भेजी रिपोर्ट

जागरण संवाददाता, बरेली। पीडब्ल्यूडी में 1.28 करोड़ के फर्जी एरियर भुगतान के मामले में प्राथमिकी के लिए कोतवाली थाना प्रभारी ने एसएसपी से अनुमति के लिए रिपोर्ट भेज दी है। एक अक्टूबर को पीडब्ल्यूडी के कार्यालय अधिशासी अभियंता की ओर से सात लोगों की ओर से शिकायती पत्र कोतवाली में दिया गया था, जिसमें सिर्फ एक ही शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर थे।

इस पर पुलिस ने दूसरा शिकायती पत्र मांगा था, लेकिन नहीं दिया गया था। अब पता चला कि ठगी के 70 लाख रुपये वापस भी आ गए हैं।पिछले दिनों महालेखाकार कार्यालय से विभाग से संबंधित रिकार्ड मंगाए गए थे।

उसकी जांच में कमियां मिलने पर संबंधित खंड के अधिशासी अभियंता से बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा गया। महालेखाकार कार्यालय, प्रयागराज से दो मामलों में 11-11 कर्मचारियों को भुगतान किए गए प्रकरणों का उल्लेख किया गया है।

एक मामले में 68.52 लाख और दूसरे में 61.21 लाख रुपये के एरियर का भुगतान किया गया। पहले मामले में सिर्फ अवर अभियंता राजाराम को 94,589 रुपये और दूसरे मामले में तत्कालीन क्लीनर 16,256 रुपये का ही रिकार्ड सही पाया गया। पहले मामले में 10 कर्मचारी और दूसरे मामले में छह कर्मचारी कभी पीडब्ल्यूडी में कार्यरत ही नहीं रहे।

जांच में सेवानिवृत्त अवर अभियंता नुपुर सिंह को 8.10 लाख, दीपक सिंह को 8.41 लाख, अमन को 8.02 लाख, सुमन तलवार को 9.60 लाख, अमृतदेव को 9.97 लाख, बेलदार दन्नो को 8.24 लाख, झंडू को 2.33 लाख, इलेक्ट्रीशियन संतोष को 2.07 लाख रुपये, चपरासी देवदत्त को 2.15 लाख, चंद्रपाल को 2.33 लाख और क्लीपर अख्तर अली को 16,256 रुपये किए गए भुगतान पर सवाल उठाए गए हैं।

सेवानिवृत्त अवर अभियंताओं के वेतन निर्धारण की गणना से एरियर का भुगतान अधिक होने की आशंका जताई गई है। इस मामले में एक अक्टूबर को अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार, प्रवीन कुमार, खंडीय लेखाधिकारी राहुल शर्मा, तत्कालीन अधिष्ठान सहायक रितेश आनंद, अभिषेक सक्सेना और प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र पाल के नाम से कोतवाली में शिकायती पत्र दिया गया था।

इसमें सिर्फ अब्दुल सत्तार के हस्ताक्षर थे। ऐसे में पुलिस ने सभी के हस्ताक्षर को कहा था लेकिन इसके बाद न तो किसी ने हस्ताक्षर किए और न ही कोई नया शिकायती पत्र दिया। अब बताया जा रहा है कि फर्जी भुगतान की रकम वापस आ गई है।

अब तक 70 लाख वापस भी आ गए हैं। थाना प्रभारी कोतवाली राजीव कुमार ने बताया कि मामले में रिपोर्ट तैयार कर सीओ कार्यालय भेज दी है। एसएसपी के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

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