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रामलीला के लिए छुट्टी न मिलने पर बरेली के प्रोफेसर ने छोड़ दी नौकरी, 18 साल से निभा रहे 'राम' का किरदार

Published: Sun, 04 Oct 2026 09:39 PM (IST)

बरेली के प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार शर्मा ने रामलीला में भगवान राम का किरदार निभाने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी क्योंकि उन्हें छुट्टी नहीं मिली।

रामलीला के लिए छुट्टी न मिलने पर प्रोफेसर ने छोड़ दी नौकरी।

रामलीला के लिए छुट्टी न मिलने पर प्रोफेसर ने छोड़ दी नौकरी।

HighLights

  1. प्रोफेसर ने रामलीला में अभिनय हेतु अपनी नौकरी छोड़ दी।

  2. 18 वर्षों तक भगवान राम का किरदार निभाया है।

  3. रामलीला को सांस्कृतिक विरासत मानकर युवाओं को प्रेरित करते हैं।

मनीस पांडेय, बरेली। रामलीला के मंच पर 18 साल भगवान राम का किरदार निभाया। उस दिव्य अहसास के साथ पल-पल जीवन जीया। भगवान की मर्यादा को पूरी तरह जीवन में उतारने का हमेशा प्रयास किया। अन्य किरदारों के मंचन में भी संतुष्टि का भाव आता।

यही कारण था कि जहां भी रहा हर साल रामलीला के समय छुट्टी लेकर घर आता और मंचन में हिस्सा लेता। एक बार गुड़गांव में छुट्टी नहीं मिली तो सहायक प्रवक्ता की नौकरी छोड़ दी और घर आकर रामलीला मंचन किया।

रामलीला के मंच से जुड़ी निष्ठा और प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी आस्था डॉ. अजय कुमार शर्मा ने इस अंदाज में बताई। सुभाषनगर निवासी डॉ. अजय ने बताया कि वर्ष 2001 से 2018 तक वह हर साल राम का किरदार निभाते रहे।

इसके बाद अन्य पात्रों की भूमिका निभा रहे है। नौकरी चाहे कहीं भी रही हो, रामलीला के दौरान एक महीने अपने शहर में बिताने की उनकी कोशिश रहती है। वर्ष-2023 में गुड़गांव के कॉलेज में कामर्स पढ़ाने के दौरान उन्होंने नवरात्र में रामलीला में अभिनय के लिए एक महीने का अवकाश मांगा, लेकिन प्रबंधन ने मना कर दिया।

इसके बाद उन्होंने 15 दिन की छुट्टी मांगी। रामलीला में अभिनय का कारण बताने पर सख्ती से अवकाश के लिए मना कर दिया गया, प्रबंधन ने कहा कि शादी या आकस्मिक परिस्थितियों में ही छुट्टी दी जा सकती है।

इसके बाद डॉ. शर्मा ने चुपचाप त्यागपत्र लिखा और प्रबंधक को सौंप दिया। वह घर लौट आए। बाद में कॉलेज प्रबंधन ने रामलीला पूरी करने के बाद वापस नौकरी ज्वाइन करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने दोबारा नौकरी नहीं की।

उन्होंने कहा कि रामलीला देश की सांस्कृतिक विरासत है। इसमें भगवान राम के जीवन और आदर्शों को लोगों तक पहुंचाया जाता है। युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाएं।

नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर प्रयास किया और खंडेलवाल कॉलेज में नौकरी मिल गई। अब दिन में पढ़ाने के बाद शाम को रामलीला और धार्मिक आयोजनों में भाग लेना आसान है।

श्री रामलीला सभा सुभाष नगर के सचिव आलोक तायल ने बताया कि डॉ. अजय शर्मा का रामलीला के लिए नौकरी छोड़ना आज भी कलाकारों के बीच प्रेरणा का उदाहरण है।

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