बरेली में नकली रंग वाली कचरी बेचने पर व्यापारी को 3 माह की जेल, ₹50 हजार जुर्माना; 190 किलो कचरी होगी नष्ट
बरेली में नकली रंग मिलाकर कचरी बेचने के आरोप में कारोबारी गौरव अरोरा को तीन माह की जेल और 50 ...और पढ़ें

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HighLights
श्यामगंज में साढ़े सात वर्ष पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने निरीक्षण कर लिया था नमूना
जागरण संवाददाता, बरेली। खाने-पीने की वस्तुओं में रंग मिलाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के लिए अदालत ने कड़ी चेतावनी दी है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम दीपक कुमार मिश्र की अदालत ने बुधवार को श्यामगंज के कारोबारी गौरव अरोरा को असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने का दोषी ठहराते हुए तीन माह के साधारण कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर 30 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
अदालत ने 190 किलो रंगीन कचरी नष्ट कराने का भी आदेश दिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम ने आठ मार्च 2019 को श्यामगंज में मैसर्स गौरव ब्रदर्स का निरीक्षण किया और वहां 13 बोरियों में करीब 190 किलो रंगीन कचरी बिक्री के लिए रखी मिली।
कृत्रिम रंग का शक होने पर अधिकारी ने 64 रुपये में दो किलो नमूना खरीदकर चार बोतलों में भरकर सील किया। एक हिस्सा जांच के लिए लखनऊ की प्रयोगशाला भेजा।
15 मार्च 2019 की रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन नमूना रंग के संदेह पर ही लिया गया था, इसलिए उसका एक हिस्सा कोलकाता की सेंट्रल फूड लेबोरेटरी भेजा गया।
वहां से 25 जून 2019 को आई रिपोर्ट में बताया कि नमूने में अनुमति से बाहर का रंग है और टार्ट्राजीन व सनसेट येलो तय सीमा से अधिक हैं, यानी कचरी असुरक्षित है।
सुनवाई में अभियोजन की ओर से खाद्य सुरक्षा अधिकारी सोमनाथ कुशवाहा की गवाही हुई और 21 दस्तावेज साबित किए गए। अदालत ने माना कि आरोपित ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं ला सके जिससे साबित हो कि उनके पास से असुरक्षित कचरी नहीं मिली या वह बेची नहीं जा रही थी, जबकि कानून में खुद को निर्दोष साबित करने का भार उन्हीं पर था।
सजा के सवाल पर आरोपित ने खुद को गरीब और परिवार का इकलौता कमाने वाला बताते हुए पहला अपराध होने के आधार पर परिवीक्षा का लाभ मांगा, पर अभियोजन अधिकारी ने सख्त सजा की मांग की। कोर्ट ने कहा कि लोग भरोसे से दुकान से खाद्य सामग्री खरीदते हैं।
ऐसे पदार्थ आम जनता के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं और यह अपराध आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए परिवीक्षा पर छोड़ना उचित नहीं होगा। अदालत ने आरोपित की जमानत निरस्त कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया।
