बरेली: अवैध निर्माण पर BDA का डंडा, नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल सील; अन्य अस्पतालों की फाइलें भी खुलीं
बरेली में नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल को अवैध निर्माण के कारण सील किया गया, जिसका खुलासा अग्निकांड के बाद ...और पढ़ें

अस्पताल की सीलिंंग के दौरान मौजूद अधिकारी
HighLights
अग्निकांड के बाद अस्पताल में अवैध निर्माण की खुली थी पोल
भवन नियमावली का पालन नहीं करने वालों पर प्राधिकरण ने बैठाई जांच
नीलेश प्रताप सिंह, बरेली। मानचित्र स्वीकृति बिना नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल पर कराया जा रहा निर्माण सील कर दिया गया। अग्निकांड के बाद इस अस्पताल की पोल खुली तो अन्य भवनों पर भी ध्यान गया। पूर्व में प्राधिकरण ने कई संदिग्ध अस्पतालों को नोटिस दीं तो आवश्यक सेवा की आड़ ले ली गई। अब नये सिरे से जांच कराई जाएगी।
भवन नियमावली का उल्लंघन कर अवैध निर्माण में प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम भी कम जिम्मेदार नहीं। सुपरवाइजर, अवर अभियंता, सहायक अभियंता की जिम्मेदारी होती है कि क्षेत्र में अवैध निर्माण न होने दें। इसके बावजूद नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल बनने लगी, कई अन्य भवनों पर भी संदेह जताया जा रहा।

मिनी बाईपास पर नवोदय अस्पताल दो वर्ष पहले बना था। संचालन के समय अस्पताल तीन मंजिल था, उसका मानचित्र पास हुआ। इसके बाद चौथी मंजिल पर बिना अनुमति निर्माण होने लगा। इसकी निगरानी व रोकथाम क्षेत्रीय सुपरवाइजर, अवर अभियंता व सहायक अभियंता को करनी चाहिए थी।
रक्षाबंधन पर अस्पताल की चौथी मंजिल में आग लगी तो प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने जांच टीम भेजी। अवैध निर्माण मिलने पर उसी शाम चौथी मंजिल सील कर दी गई, मगर इसकी सूचना मंगलवार को सार्वजनिक हुई।
अब यह पता किया जा रहा कि चौथी मंजिल का निर्माण कब शुरू हुआ, उस समय निगरानी व रोकथाम का जिम्मेदार कौन था। इसके साथ ही प्राधिकरण ने अस्पतालों की पुरानी फाइलें भी निकलवा लीं।
उनमें से कई को भवन निर्माण नियमावली का पालन नहीं करने पर नोटिस जारी की गई थी। उसमें भी खेल हुआ। सीलिंग, ध्वस्तीकरण की नोटिस पर अस्पतालों के प्रबंधन ने आवश्यक सेवाओं की आड़ लेकर मोहलत मांग ली थी। अब देखा जाएगा कि कौन से अस्पताल अभी भी बिना मानक संचालित हो रहे।
कई अस्पताल नियमों पर भारी
बीते दिनों लखनऊ में कोचिंग में अग्निकांड के बाद प्राधिकरण की ओर से कोचिंग संस्थान, पार्टी हाल, स्टोर-पार्किंग आदि की जांच की गई। इन सबके बीच रामपुर गार्डन, राजेंद्रनगर-डीडीपुरम, स्टेडियम रोड, पीलीभीत बाइपास रोड, मिनी बाइपास रोड समेत अन्य क्षेत्रों में बने कई अस्पतालों में बेसमेंट के साथ अन्य ऊंची मंजिलों के मानचित्र स्वीकृत नहीं कराए गए।
भवन निर्माण से पहले करने यह प्रक्रिया अनिवार्य
शहरी क्षेत्र में भवन निर्माण से पहले आर्किटेक्ट से नक्शा बनवाकर स्वीकृति के लिए प्राधिकरण में आवेदन करना होता है। फायर समेत अन्य संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना होता है। प्राधिकरण से स्वीकृति के बाद निर्माण, इसके बाद पूरा होने पर आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करना होता है।
शहरी क्षेत्र में संचालित अस्पतालों की ओर से भवन नियमावली का कितना पालन किया जा रहा, इसकी विस्तृत जांच करा रहे। रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- सौम्या पांडेय, बीडीए उपाध्यक्ष
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