बरेली के मेडिकल कॉलेजों में बड़ा खेल: 8 हजार का कैंसर इंजेक्शन मरीज को ₹70,000 में बेचा, जांच रिपोर्ट में हुआ भंडाफोड़
बरेली के दो मेडिकल कॉलेजों में औषधि विभाग के निरीक्षण में कैंसर की दवाओं और इंजेक्शनों को कई गुना महंगे ...और पढ़ें

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HighLights
जिले के दो मेडिकल कालेजों में औषधि विभाग के निरीक्षण में खुला महंगे इलाज का खेल
एक लाख का इंजेक्शन डेढ़ लाख तक में दे रहे, मेडिकल कालेजों से मांगा जवाब
अनिल कुमार, बरेली। दवाओं के नाम पर महंगे इलाज का खेल लगातार चल रहा है। कैंसर के इलाज के नाम पर अस्पतालों में लूट सी मची है। जिले के दो मेडिकल कालेजों में औषधि विभाग के निरीक्षण में भी महंगे इलाज का बड़ा खेल पकड़ में आया है। इन मेडिकल कालेज में इंजेक्शन और दवाएं कई गुणा महंगे दाम पर दी जा रही हैं।
आठ हजार का इंजेक्शन के मरीज से 70 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। औषधि विभाग ने निरीक्षण रिपोर्ट मुख्यालय लखनऊ भेज दी है। वहीं एक मेडिकल कालेज से इस मामले में जवाब मांगा गया है और जल्द ही दूसरे से भी जवाब मांगा जाएगा।
कैंसर के महंगे इलाज सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। इसके बाद से प्रदेश में औषधि विभाग सक्रिय हुआ है। प्रदेश में सबसे पहले सरकारी और निजी मेडिकल कालेजों में निरीक्षण किया जा रहा है।
बरेली में दो मेडिकल कालेजों की सेंट्रल फार्मेसी का औषधि विभाग ने 24 और 29 सितंबर को निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने सबसे महंगी दवाओं की जांच की और इनकी खरीद, एमआरपी और मरीज को किस दाम पर दिया गया, इसकी जांच की।
इनमें से अधिकांश दवाएं कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। 24 सितंबर को जिस मेडिकल कालेज में निरीक्षण किया, वहां मेगास्ट्राल एसिटेट टैबलेट 942 रुपये में खरीदी गई थी लेकिन मरीज को यह 1980 रुपये में दी गई।
इसी तरह से पैलापेरिब टैबलेट 7200 में खरीदकर 14057 रुपये में मरीज को, बेबासिजुमैब इंजेक्शन आठ हजार में खरीदकर 69995 रुपये में मरीज को, पेगास्प्रोगैस इंजेक्शन 9850 में खरीदकर मरीज को 38215 रुपये में दिया गया।
29 सितंबर को जिस मेडिकल कालेज में निरीक्षण किया गया, वहां पर बेबेंसियो इंजेक्शन 100926 रुपये में खरीदकर 146800 रुपये में मरीज को, डेगरिंटा इंजेक्शन 11825 रुपये में खरीदकर 22070 में मरीज को, इवैरा इंजेक्शन 17000 में खरीदकर 23073 रुपये में मरीज को दिया।
इसी तरह से दोनों मेडिकल कालेज में अन्य दवाएं भी सस्ते दाम पर खरीदकर मरीजों को कई गुणा महंगे दाम पर दी गईं। इन सभी दवाओं की एमआरपी ही काफी अधिक है, जिससे मरीज भी कुछ कह नहीं पाते हैं।
24 घंटे की फार्मेसी सिर्फ एक फार्मासिस्ट का पंजीकरण
दोनों मेडिकल कालेज की सेंट्रल फार्मेसी 24 घंटे चल रही हैं लेकिन सिर्फ एक ही फार्मासिस्ट के नाम से पंजीकरण किया गया है। फार्मेसी में अन्य फार्मासिस्ट तो मौजूद हैं लेकिन यह पंजीकरण सिर्फ एक का कराकर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
दो मेडिकल कालेज में टीमों ने निरीक्षण किया था। यहां से सबसे महंगी दवाओं की खरीद, एमआरपी और मरीज को कितने दाम पर देने का रिकार्ड चेक किया तो कई गुणा महंगे दाम पर मरीजों को दवाएं देने का मामला सामने आया है। एक मेडिकल कालेज से जवाब मांगा गया है, जल्द ही दूसरे भी जवाब मांगा जाएगा।
- संदीप कुमार, सहायक आयुक्त औषधि
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