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दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाली जाट रेजिमेंट का एक और कमाल; पर्यावरण संरक्षण में देश में हासिल किया पहला स्थान

Published: Sun, 25 Oct 2026 06:00 AM (IST)

जाट रेजिमेंट सेंटर ने पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारतीय सेना के सभी इन्फैंट्री केंद्रों में शीर्ष स्थान प्राप्त ...और पढ़ें

स्वच्छता और हरियाली से भरा जाट रेजिमेंट सेंटर का दृश्य। सौ. सेना

स्वच्छता और हरियाली से भरा जाट रेजिमेंट सेंटर का दृश्य। सौ. सेना

HighLights

  1. उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर जाट रेजिमेंट सेंटर ने सेना के सभी इन्फैंट्री केंद्रों में बनाया शीर्ष स्थान

जागरण संवाददाता, बरेली। जाट बलवान, जय भगवान…। रणभूमि में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले जाट रेजिमेंट के जवानों ने अब पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर भी अपना दम दिखाया है। जिस रेजिमेंट की पहचान शौर्य, वीरता और अनुशासन से है, उसने स्वच्छता और हरियाली के क्षेत्र में भी देशभर में परचम लहराया है।

यहां बेकार दूध के पैकेट पौधे तैयार करने के काम आते हैं तो आरओ से निकलने वाला पानी भी व्यर्थ नहीं बहता। पुराने इलेक्ट्रानिक उपकरणों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाता है और पुनर्चक्रित प्लास्टिक से उपयोगी संसाधन तैयार किए जाते हैं।

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इन्हीं प्रयासों के दम पर बरेली स्थित जाट रेजिमेंटल सेंटर ने भारतीय सेना के सभी इन्फैंट्री केंद्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। शुक्रवार को दिल्ली में इसे वर्ष 2026 का सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ, हरित एवं सतत इन्फैंट्री केंद्र चुना गया।

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने जाट रेजिमेंट के कमांडेंट ब्रिगेडियर हरजीत प्रीत पाल सिंह, वीएसएम को सम्मान प्रदान किया। जाट रेजिमेंट सेंटर की यह उपलब्धि केवल साफ-सुथरी सड़कों और हरे-भरे परिसर तक सीमित नहीं है।

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यहां पर्यावरण संरक्षण को सैनिकों की दिनचर्या और प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। कचरे का दोबारा उपयोग, पानी की बचत और संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसका उद्देश्य स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित रखने के बजाय नियमित व्यवस्था में शामिल करना है। प्रशिक्षण लेने वाले अग्निवीर भी इन प्रयासों से संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक संदेश प्राप्त कर रहे हैं।

दूध के खाली पैकेटों में उग रहे पौधे

जाट रेजिमेंट सेंटर में कचरे को उपयोगी बनाने के लिए कई पहल की गई हैं। यहां इस्तेमाल के बाद दूध के खाली पैकेट फेंके नहीं जाते, बल्कि उनका उपयोग पौधशाला में पौधे तैयार करने के लिए किया जाता है।

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अग्निवीर प्रशिक्षण क्षेत्र में पुनर्चक्रित प्लास्टिक से बने चार व्यक्तियों के उपयोग वाले शौचालय सेट लगाए गए हैं। इसी तरह इलेक्ट्रानिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए सैनिकों और उनके परिवारों के बीच विशेष अभियान चलाया गया।

एकत्रित ई-कचरे को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रित करने के लिए एटेरो रीसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया। इससे इलेक्ट्रानिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की गई है।

आरओ का बेकार पानी भी आ रहा काम

जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सेंटर ने उपयोगी व्यवस्था अपनाई है। अधिक क्षमता वाले आरओ संयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट जल को व्यर्थ बहाने के बजाय कपड़े धोने, सैन्य परिवहन के वाहनों की सफाई और उद्यानों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

इससे पानी की बर्बादी कम करने में मदद मिल रही है। सैनिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा कक्ष में पानी की गुणवत्ता जांचने वाली किट भी रखी गई हैं।

इनसे जरूरत के अनुसार पानी की जांच की जा सकती है। इस तरह जाट रेजिमेंट सेंटर ने स्वच्छता, हरियाली और संसाधनों के संरक्षण को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाकर देशभर के इन्फैंट्री केंद्रों के सामने उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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