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उत्पीड़न मामले में घिरे पप्पू गिरधारी पर 36 साल पुराने जैन दंपति हत्याकांड का शिकंजा, 4 नवंबर को सुनवाई

Published: Wed, 21 Oct 2026 06:15 AM (IST)

पप्पू गिरधारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि 36 साल पुराने जैन दंपति हत्याकांड में उन पर शिकंजा कस रहा ...और पढ़ें

पप्पू गिरधारी

पप्पू गिरधारी

HighLights

  1. जैन हत्याकांड का अपर सेशन कोर्ट-दशम में चल रहा केस

  2. उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के उत्पीड़न मामले में घिरे हैं पप्पू

जागरण संवाददाता, बरेली। उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के उत्पीड़न के आरोपित गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी पर 36 साल पुराने चर्चित जैन दंपति हत्याकांड में भी शिकंजा कस सकता है। इस मामले की पत्रावली कोर्ट से गायब होने का संज्ञान हाइकोर्ट ने लिया। तब सेशन कोर्ट ने पत्रावली पुनर्निमित करने की कार्रवाई शुरू की थी।

मामले में चार नवंबर को अगली तिथि नियत है। वहीं, देहरादून में उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज होने के बाद बरेली पुलिस ने भी उसका आपराधिक इतिहास खंगाल निकाल लिया है, और उस पर कार्रवाई तलवार कभी भी लटक सकती है।

थाना बारादरी के सिविल लाइन स्थित आवास पर वर्ष-1990 में नरेश जैन व उनकी पत्नी पुष्पा जैन की घर के अंदर चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी।

मामले में दंपति की पुत्री प्रगति जैन ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 11 जून को हत्याकांड की रात करीब सवा नौ बजे परिजन घर के अंदर टीवी देख रहे थे। इसी दौरान हत्यारे घर में घुस आए और पिता से बातचीत के दौरान ही उन पर चाकुओं से हमला कर दिया।

प्रगति जैन व उनकी बहन प्रेरणा जैन पिता को बचाने आईं। मां पुष्पा जैन भी चीख पुकार सुनकर दौड़ती हुई कमरे में पहुंचीं। आरोपितों ने उन पर भी चाकुओं से हमला कर दिया। इस दौरान दोनों बहनें भी घायल हो गईं।

टेलीफोन के जरिए पुलिस को खबर करने की कोशिश पर आरोपितों ने टेलीफोन का तार भी काट दिया। दोनों शवों को लहूलुहान हालत में छोड़कर आरोपित मौके से भाग गए थे।

मामले में करीब एक दर्जन आरोपितों पर कार्रवाई शुरू हुई, जिनमें से आधा दर्जन की अब तक मौत हो चुकी है। आरोपितों पर हत्या, हत्या का आपराधिक षड्यंत्र रचना, जमीन हड़पने के लिए जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

मामले की तब से लगातार अदालत में सुनवाई जारी थी कि इस बीच घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया। वर्ष 2013 में इस सनसनीखेज हत्याकांड की पत्रावली कोर्ट से गायब हो गई।

न्यायालय लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और उसे जेल जाना पड़ा। कोरोना काल में गिरधारी लाल साहू उर्फ़ पप्पू के खिलाफ अदालत से गैर हाजिरी पर गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ जिसे पप्पू ने कोर्ट में हाजिर होकर दुरुस्त करा लिया।

गिरधारी पप्पू की तरफ से इस पत्रावली को संबंधित न्यायालय से किसी अन्य न्यायालय में सुनवाई के लिए स्थानांतरित किए जाने की अर्जी हाईकोर्ट में दी गई।

पत्रावली के गायब होने का मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तो हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट को पत्रावली को पुनर्गठित कराए जाने का आदेश जारी किया।

वादी पक्ष व बचाव पक्ष दोनों को सूचित किया गया कि पक्षों के पास जो भी कागजात संबंधित पत्रावली के हों उन्हें कोर्ट में दाखिल करके सहयोग करें, ताकि मामले की दोबारा सुनवाई शुरू हो सके। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल यह पत्रावली पुनर्गठन की स्थिति में अपर सेशन कोर्ट में विचाराधीन है। जिसमें आगामी चार नवंबर तिथि नियत है।

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