2013 में लॉकर से गायब हो गई थी हत्या की फाइल, आज हाईकोर्ट में सुनवाई; मंत्री रेखा आर्या के पति हैं मुख्य आरोपी
बरेली के 1990 के जैन दंपती हत्याकांड की गायब हुई फाइल पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। मुख्य आरोपी पप्पू ...और पढ़ें

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HighLights
बरेली में वर्ष 1990 में हुए हत्याकांड में पप्पू गिरधारी है आरोपित
डबल लाकर में रखी गई फाइल हो गई थी गायब, दोबारा बन रही
जागरण संवाददाता, बरेली। जैन दंपती हत्याकांड की फाइल पुनर्गठन मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। हत्याकांड में गिरधारी लाल साहू (पप्पू गिरधारी) आरोपित है। 13 वर्ष पहले विशेष बक्से व डबल लाकर में रखी केस की फाइल स्थानीय कोर्ट कक्ष से गायब हो गई, जिसे दोबारा तैयार करने के आदेश हुए थे। इस पर वादी पक्ष से कोर्ट में कागज सौंप दिए थे, मगर आरोपित पक्ष बचता रहा।
कोर्ट ने आरोपितों के बयान दर्ज कराने का आदेश दिया तो आपत्ति जताते हुए पप्पू गिरधारी हाईकोर्ट चला गया। वह इन दिनों अपनी पत्नी एवं उत्तराखंड की बाल विकास एवं महिला सशक्तीकरण मंत्री रेखा आर्या के उत्पीड़न को लेकर भी चर्चा में है। 15 अक्टूबर को मंत्री ने उसके विरुद्ध देहरादून में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
वर्ष 1990 में लकड़ी कारोबारी नरेश जैन और उनकी पत्नी पुष्पा जैन की हत्या की गई थी। उस समय पप्पू गिरधारी समेत 14 को नामजद कराया गया। इस केस में 33 लोगों की गवाही हो चुकी।
जैन दंपती की बेटी प्रगति जैन, प्रेरणा जैन व वरुणा जैन ने मुख्य चश्मदीद गवाह के रूप में जेल में आरोपितों की पहचान परेड और कोर्ट में शिनाख्त की थी। पुलिस के अनुसार, हत्यारोपित एंबेसडर कार से जैन दंपती के घर पहुंचे थे, उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी।
जांच में पता चला कि जैन दंपती की संपत्ति से जुड़े कुछ फर्जी बैनामे दिल्ली में कराए गए। उसकी सत्यता जांचने के लिए हैंडराइटिंग और निशानी अंगूठे के विशेषज्ञों से राय ली गई। घटनास्थल पर टेलीफोन रिसीवर पर मिले फिंगरप्रिंट की भी जांच कराई गई थी।
वादी पक्ष के अनुसार, गवाही के दौरान उन पर दबाव बनाया गया तो पुलिस सुरक्षा मांगनी पड़ी थी। गवाहों और साक्ष्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके अधिवक्ता के विशेष अनुरोध पर इस केस की पत्रावली को लोहे के विशेष बक्से और डबल लाकर में रखा गया था।
इसके बावजूद वर्ष 2013 में अभियुक्तों के बयान दर्ज किए जाने के समय फाइल खो गई। इस गंभीर लापरवाही पर कोर्ट के कड़े रुख के बाद कर्मचारियों के विरुद्ध कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
कोर्ट ने फाइल रिकंस्ट्रक्शन यानी पत्रावली के पुनर्गठन का आदेश भी दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों से कागज मांगे गए। वादी पक्ष ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने गवाही के वक्त ही बयानों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कर ली। वे दोबारा दाखिल कर दीं।
इस मामले में छह आरोपित जीवित हैं, जिनमें गिरधारी लाल साहू, साबिर व बजरुद्दीन, नरेश, योगेश व हरपाल है। नौ अक्टूबर को सुनवाई के दौरान केवल हरपाल और साबिर ही अदालत में हाजिर हुआ, बाकी आरोपितों की ओर से हाजिरी माफी की अर्जी दी गई।
मुख्य आरोपित गिरधारी उर्फ पप्पू गिरधारी अंतिम बार इसी वर्ष 13 फरवरी को कोर्ट में पेश हुआ था। दो वर्ष पहले इस मामले की महिला आरोपित पूनम उर्फ सुनीता उर्फ गुड्डी की मौत की जानकारी कोर्ट को दी गई।
तब ट्रायल कोर्ट ने महिला आरोपित की मौत के संबंध में आख्या तलब की थी। फिलहाल गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी द्वारा सेशन कोर्ट के पारित आदेश के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई, जिस पर आगामी 22 अक्टूबर 2026 को सुनवाई तय है।
वादिनी पक्ष के अधिवक्ता उमंग रावत शीनू का कहना है कि आरोपित जानबूझकर इस मामले में कानून का दुरुपयोग करते हुए कानूनी पेंच फंसाकर मामले को लटकाए रखना चाहते हैं।
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