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मासूमों की जान पर भारी प्रशासनिक लापरवाही! बरेली में जर्जर छतों और खुले ट्रांसफार्मर के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे

Published: Sat, 22 Aug 2026 05:19 PM (IST)

बरेली के कई स्कूलों में जर्जर भवन, खुले ट्रांसफार्मर और जलभराव के कारण बच्चों की जान खतरे में है, जिस ...और पढ़ें

माॅडल कंपोजिट विद्यालय में टूटी छत के नीचे बैठे विद्यार्थी और मीरगंज के उच्च प्राथमिक विद्यालय की जर्जर छत जागरण

माॅडल कंपोजिट विद्यालय में टूटी छत के नीचे बैठे विद्यार्थी और मीरगंज के उच्च प्राथमिक विद्यालय की जर्जर छत जागरण

HighLights

  1. स्कूल के जर्जर भवन में संवार रहे बच्चों का भविष्य, जिम्मेदार अनजान

  2. चीनी मिल कालोनी में फील्ड में जलभराव, कीचड़ से आवागमन कर रहे बच्चे

मनीस पांडेय, बरेली। स्कूलों में पठन-पाठन के साथ ही नौनिहालों की सुरक्षा व सुविधा की चिंता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं, लेकिन जिले में अधिकारियों का रवैया बेहद लापरवाह है। जिले के परिषदीय स्कूलों की हालत दयनीय है। यहां कई विद्यालयों में बच्चों की जान खतरे में है।

रोज खतरों के बीच अपना सिर छिपा कर मासूम पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वहीं जिले के आला अधिकारी सब कुछ जानने के बाद भी चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में किसी दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है, जो जानलेवा भी बन सकता है।

शहर के बिहारीगंज पुलिस चौकी से सटा हुआ माडल कंपोजिट विद्यालय किशोर बाजार में बच्चों की जान हर समय खतरे में रहती है। शिक्षकों के अनुसार यह विद्यालय आजादी से पहले का ही बना हुआ है, लेकिन विद्यालय के वर्तमान भवन का निर्माण कार्य वर्ष-2006 का बताया जा रहा है।

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इस नाम के आदर्श विद्यालय में दो अन्य विद्यालयों को भी मर्ज किया गया है। इसमें प्राथमिक विद्यालय चौपुला व प्राथमिक विद्यालय किशोर बाजार शामिल है। ऐसे में तीन विद्यालयों के सभी बच्चों को मिलाकर यहां पहली से आठवीं तक के बच्चों की कुल संख्या 169 है।

यहां पर बच्चोें के लिए कुल पांच अलग-अलग कमरे हैं। वहीं बड़ी संख्या में बच्चे बरामदे में भी बैठकर पढ़ाई करते हैं। विद्यालय की छत काफी जर्जर हालत में है। स्थिति यह है कि हर तीसरे व चौथे दिन यह छत टुटड़ों में टूटकर बच्चों के सिर पर ही गिरती है।

हालांकि अभी तक किसी बच्चे को इससे बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन इसकी मरम्मत की भी विभाग की कोई योजना नहीं है।प्रधानाध्यापक अरुणेश कुमार शर्मा ने बताया कि विद्यालय के लगभग सभी कमरों में छत का कुछ हिस्सा टूटकर गिर रहा है।

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इस संबंध में नगर शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन इसके सुधार के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं किए जा सके हैं। वहीं पीछे की ओर पहली से पांचवीं कक्षा के भवन का मुख्य गेट बिजली के खुले ट्रांसफार्मर से सटा हुआ है। ऐसे में यहां भी कभी हादसा होने की आशंका बनी हुई है।

सीमेंटेड चादर के नीचे पढ़ाई कर रहे बच्चे, बाहर भरा पानी

शहर के बदायूं रोड स्थित बंद पड़ी चीनी मिल परिसर में प्राथमिक विद्यालय सन 1932 से संचालित है। पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए इस परिसर में मुख्य भवन जर्जर होने के बाद अब सीमेंटेड चादर वाले परिसर में बच्चों के अध्यापन का कार्य किया जा रहा है।

वहीं विद्यालय परिसर के बाहर फील्ड जलभराव के चलते तालाब बन गई है। बच्चों को मजबूरी मेें कीचड़ व जलभराव के बीच से ही स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। प्रधानाध्यापक निधि ने बताया कि विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है।

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अभी तक कुल 70 बच्चे पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा कि वार्ड चार में यह इकलौता विद्यालय है। यदि यह विद्यालय बंद हुआ या कहीं अन्य जगह शिफ्ट हुआ तो बच्चे ज्यादा दूर पढ़ने के लिए नहीं जाएंगे। विद्यालय में वह एकल शिक्षक हैंं। उनके साथ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व एक वांलिटियर उपलब्ध हैं।

तीनों अध्यापन कार्य में सहयोग कर रहे हैं। करीब 40 बच्चों के लिए फर्नीचर की सुविधा है, वहीं करीब 30 बच्चों के लिए फर्नीचर नहीं है। ऐसे में वह जमीन पर चटाई बिछा कर बैठाए जा रहे हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि फर्नीचर के बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

मीरगंज में जर्जर भवन में बैठ रहे बच्चे

विकासखंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय जौनेर के जर्जर भवन में बच्चों का भविष्य संवर रहा है। भवन के बरामदा इतना जर्जर हो चुका है कि किसी भी समय हादसे की आशंका बनी रहती है। विद्यालय का प्लास्टर बार-बार झड़ रहा है।

रसोईघर की छत से सरिया तक बाहर नजर आ रहा है। शौचालय का प्लास्टर और टाइलें भी टूटकर गिर चुकी हैं। छत से पानी टपकने के कारण छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बरामदे में पानी भरने और छत टपकने के चलते बच्चों को वहां बैठने में दिक्कत हो रही है। इस स्थिति के चलते मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को भोजन भी कक्षा-कक्ष में ही कराया जाता आ रहा है। विद्यालय में इस समय 91 विद्यार्थी हैं।

प्रधानाध्यापक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के कारण बच्चों के सभी शैक्षिक एवं अन्य कार्य कक्षा-कक्षों में ही संचालित किए जा रहे हैं। बरामदे की छत से पानी टपकने की समस्या की सूचना खंड शिक्षा अधिकारी मीरगंज व अन्य संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है।

विद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित रहे। खंड शिक्षा अधिकारी अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय का बरामदा व एक अन्य कमरा जर्जर भवन की सूची में शामिल है।

जिला स्तरीय समिति से मूल्यांकन हो चुका है, नीलामी होनी शेष है। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही स्कूल परिसर में नव निर्माण कराया जा सकेगा। साफ जाहिर है कि भवन की नीलामी होने तक विद्यार्थी इसी जर्जर भवन में शिक्षा ग्रहण करते रहेंगे।

 

जर्जर भवनों के मूल्यांकन का कार्य समिति के माध्यम से किया जा रहा है। माडल कंपोजिट विद्यालय किशोर बाजार के मरम्मत का प्रस्ताव नगर निगम को दिया गया है। शीघ्र ही व्यवस्था बेहतर की जाएगी। वहीं अन्य भवनों की स्थिति में भी सुधार कराया जाएगा।

- डाॅ. विनीता, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बरेली।


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