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सावधान! इंटरनेट पर शुगर ठीक करने की फर्जी दवा बेच रहा था गिरोह, बरेली पुलिस ने ऐसे किया भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

Published: Mon, 14 Sep 2026 04:17 PM (IST)

बरेली पुलिस ने इंटरनेट पर तीन दिन में शुगर ठीक करने का दावा कर नकली दवाएं बेचने वाले एक गिरोह ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बरेली के आरोपित इंटरनेट मीडिया पर करते थे तीन दिन में शुगर ठीक करने का दावा

  2. वेबसाइट पर मंगवाते थे आर्डर, फर्जी काल सेंटर भी बनाया, उत्तराखंड का दर्शाया पता

जागरण संवाददाता, बरेली। तीन दिन में शुगर ठीक हो जाएगी...। साजिद, इस्लाम व जफर ने इंटरनेट मीडिया पर ऐसे दावे कर दर्जनों लोगों को ठग लिया। जरूरतमंदों ने दवा के आर्डर किए तो आरोपितों ने नकली दवाएं भेज दीं। आर्डर व डिलीवरी के लिए फर्जी वेबसाइट, काल सेंटर बना लिया। रविवार को पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

आरंभिक जांच में पता चला कि आरोपित जिन दवाओं को कोरियर से जरूरतमंद तक भेजते थे, उन पर नाम लिखा ना निर्मित होने का वर्ष। गुणवत्ता जांच का भी कोई प्रमाण नहीं था। अब इस गिरोह के दो अन्य आरोपितों रऊफ व रिजवान की तलाश की जा रही।

भोजीपुरा निवासी साजिद मलिक ने ठगी का जाल बुना था। उसे पता था कि शुगर के मरीजों की संख्या सर्वाधिक है, इसलिए इसे मर्ज को ठीक करने के बहाने लोगों को शिकार बनाएंगे।

इसके लिए पूरा गिरोह तैयार किया गया, जो सैलानी में यादगार रेस्टोरेंट के पास मकान में नकली दवाओं की पैकिंग, डिलीवरी आदि करता था। पुलिस के अनुसार, इसकी सूचना पर रविवार को छापेमारी कर साजिद, इस्लाम व मोहम्मद जफर को पकड़ा।

वहां 75 डिब्बों में दवाएं भरी मिलीं, बिक्री का लाइसेंस भी नहीं था। आरोपित कुछ दुकानों से जड़ी-बूटियां व गोलियां लेकर पैकिंग कराते थे। उनकी पैकिंग पर आरके इंटरप्राइजेज, डियाबो-वीटा केयर, अयूर लाइफ और हमदम फार-ऐवर इंडिया आदि नाम छपवाते ताकि कंपनी की दवाएं लगीं।

आरंभिक जांच में पता चला कि ये सभी कंपनियां फर्जी थीं। साजिद ने बताया कि दवा खरीद के इच्छुक लोग विज्ञापन के जरिये उसकी वेबसाइट पर आर्डर करते थे। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य उस व्यक्ति से फोन पर बात कर दवा के दाम, डिलवरी आदि के बारे में बात करते।

उनसे कहा जाता था कि दवा कंपनी उत्तराखंड में है, वहीं से आर्डर आएगा। दवा की कीमत भी 1000 से 1450 रुपये के बीच बताई जाती, ताकि लोग आसानी से खरीद सकें। जितने ज्यादा खरीदार आते थे, उतना ज्यादा लाभ होता।

गिरोह में रऊफ और रिजवान मियां भी शामिल हैं। रऊफ और साजिद सगे भाई हैं। साजिद, रऊफ, पीलीभीत के रिजवान ने कंपनी बनाई थी। नकदी दवा बनाने व पैकिंग का काम रऊफ व रिजवान देखता था, इस्लाम इंटरनेट मीडिया पर प्रचार करता था।

एएसपी आशुतोष शिवम ने बताया कि गिरोह के पांचों सदस्यों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह भी पता कराया जा रहा कि शुगर की दवा के नाम पर कौन सी गोलियां दी जा रही थीं, उनकी गुणवत्ता क्या थी।

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