6 महीने में 3 साल की BA की डिग्री? बरेली में फर्जी मार्कशीट रैकेट का भंडाफोड़, सेना के जवान भी थे निशाने पर
बरेली में फर्जी मार्कशीट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें छह महीने में तीन साल की बीए डिग्री बनवाई जा ...और पढ़ें

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HighLights
गढ़वाल और नागालैंड के विश्वविद्यालयों से अंक पत्रों का कराया जा रहा सत्यापन, नोएडा भी गई टीम
जागरण संवाददाता, बरेली। छह महीने में तीन वर्ष के बीए का अंकपत्र और डिप्लोमा के प्रमाणपत्र बनवाने के पूरे नेटवर्क के राजफाश में पुलिस लगी हुई है। अब तक की जांच में पूरा खेल दूरस्थ शिक्षा के नाम पर सेंटर खोलकर करने का सामने आया है। प्रदीप गंगवार के डेस्टिनी एजुकेशन सेंटर से मिले 21 अंकपत्रों की जांच के लिए नागालैंड और गढ़वाल के विश्वविद्यालयों से सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक टीम नोएडा भी सत्यापन के लिए भेजी गई है। सत्यापन के बाद पुलिस नोएडा के रामचरन से भी पूछताछ करेगी।
पुलिस जांच में पता चला कि प्रदीप गंगवार ने कौशल विकास योजना के तहत डीडीपुरम में डिस्टेंस लर्निंग सेंटर खोल रखा था। उसने महर्षि दयानंद वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से सेंटर का पंजीकरण करा रखा है।
इसके जरिए वह डिप्लोमा व प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता है। दिल्ली में संचालित इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर पवन गुप्ता बरेली के ही रहने वाले हैं। पुलिस ने पवन गुप्ता को बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने सेंटर की अनुमति देने की पुष्टि की है।
अब पुलिस हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, महाराजा अग्रसेन गढ़वालियन और नार्थ ईस्ट क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी, नागालैंड यूनिवर्सिटी से बने अंकपत्रों की जांच करा रही है। ये अंकपत्र असली हैं या फर्जी हैं, इसका पता इन यूनवर्सिटी से ही पता चल सकेगा।
इन विश्वविद्यालयों ने क्या किसी को सेंटर खोलने की अनुमति दी है या फिर फर्जी तरीके से सेंटर संचालित कर इन विश्वविद्यालयों में नामांकन कराकर अंकपत्र बनवाए जा रहे थे।
सीओ तृतीय एएसपी शिवम आशुतोष ने बताया कि दूरस्थ शिक्षा के तहत सेंटर खोलकर अंकपत्र व प्रमाणपत्र का तथ्य सामने आया है। अंकपत्रों का सत्यापन विश्वविद्यालयों से कराया जा रहा है।
कमरे में ही परीक्षा और अंकपत्र सब बनता है
पुलिस जांच में आया कि प्रदीप गंगवार डीडीपुरम में दो कमरों ही पूरा सेंटर संचालित करा रहा था। नियम के तहत डिप्लोमा या अन्य प्रमाणपत्र के लिए सेंटर पर पढ़ाई के साथ परीक्षा दिलाने के इंतजाम होने चाहिए लेकिन प्रदीप गंगवार सिर्फ लोगों का रजिस्ट्रेशन ही कराता था।
यहां कोई कक्षाएं संचालित नहीं होती थीं। एक कमरे में ही परीक्षा भी हो जाती थी और परीक्षा पंजीकृत अभ्यर्थियों की जगह किसी दूसरे से करा दी जाती थीं।
फौजी और उनके बच्चों को करता था टारगेट
पुलिस जांच में पता चला कि कई फौजी सेवानिवृत्ति के बाद दूसरी नौकरी के लिए डिप्लोमा और प्रमाणपत्र करते हैं। प्रदीप गंगवार के पिता भी पूर्व फौजी हैं। इससे पहले उसके पिता ही सेंटर संचालित करते थे।
वह पिता के माध्यम से ही पूर्व फौजी या फिर उनके बच्चों से संपर्क कर उनके अंकपत्र और प्रमाणपत्र बनवाता था। उसके पास से मिले 21 अंकपत्र भी अधिकांश उत्तर भारत के अलग-अलग शहरों के लोगों के नाम से बने हैं।
सगरूर, पंजाब निवासी राहुल सिंह भी फौजी का बेटा है। उनकी शिकायत के बाद ही पुलिस ने प्रदीप गंगवार को गिरफ्तार किया है। उसके पास से बरामद 12 मार्कशीट में बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की मार्कशीट वर्ष 2019, 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 की हैं।
