बरेली में बज रहे 'जानलेवा' DJ: 55 dB की सीमा तय, फिर भी 120 डेसिबल के शोर से मंडरा रहा हार्ट अटैक का खतरा
इलाहाबाद हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद भी, बरेली में डीजे और म्यूजिक सिस्टम तय सीमा से कहीं अधिक 120 डेसिबल ...और पढ़ें

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HighLights
जुलूसों में डीजे और पार्टियों में 120 डेसिबल या उससे अधिक कर रहे आवाज
जागरण संवाददाता, बरेली। इलाहबाद हाईकोर्ट ने बलरामपुर में कक्षा दो की छात्रा की तेज आवाज डीजे व म्यूजिक सिस्टम के कारण गिरने के बाद हुई मृत्यु का संज्ञान लिया है। यानी तेज आवाज म्यूजिक सिस्टम अब लोगों की जान भी ले रहा है।
मानकों के अनुसार किसी भी म्यूजिक सिस्टम को 55 डेसिबल तक आवाज में बजाया जाना है, लेकिन जुलूस, शादी-पार्टियों में 120 डेसीबल से अधिक आवाज में म्यूजिक सिस्टम बजाए जा रहे हैं।
प्रोफेशनल डीजे और पार्टी साउंड सिस्टम की क्षमता 500 वाट से लेकर कई हजार वाट तक होती है, जो आसानी से 100 से 120 डेसिबल या उससे अधिक की तेज आवाज उत्पन्न कर सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, 75 से 85 डेसिबल से अधिक की आवाज का लंबे समय तक संपर्क कानों के लिए खतरनाक हो सकता है।
कानूनी तौर पर रिहायशी इलाकों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के लिए अधिकतम सीमा 55 डेसिबल तय की गई है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ कान, नाक एवं गला रोग विशेषज्ञ डाॅ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 70 से 80 डेसिबल तक की आवाज कान आसानी से सहन करते हैं।
इससे अधिक पर परेशानी शुरू हो जाती हैं। 100 डेसिबल या इससे अधिक की आवाज होने पर कान का पर्दा के भी नुकसान पहुंचता है। सुनने की क्षमता भी प्रभावित होनी शुरू हो जाती है।
उन्होंने बताया कि बम फटने जैसी तेज आवाज होने पर एकास्टिक ट्रामा यानी ध्वनि आघात होता है और कान के अंदर काफी नुकसान पहुंचता है।
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. पवन गोयल ने बताया डीजे की तेज आवाज से रक्तचाप बढ़ जाता है और धमनियों में जमा प्लाक फट जाता है। इससे खून का थक्का जमने लगता है जो खून का बहाव दिल और दिमाग की तरफ रोक देता है।
इसकी वजह से हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार डीजे पर डांस करने समय भी रक्तचाप बढ़ जाता है और प्लाक फटने से जान चली जाती है।
शहर में बिक रहे तेज आवाज के साउंड सिस्टम
शहर में 100 से अधिक डीजे साउंड सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। नावेल्टी चौराहा स्थित रोडवेज पर साउंड सिस्टम उपलब्ध कराने वाली बड़ी दुकानें भी हैं।
साउंड लाइट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विनायक राजन ने बताया कि पार्टी और कार्यक्रम में सभी कार्य नियमों के अधीन होते हैं, लेकिन कार्यक्रम के संयोजक अक्सर आवाज बढ़ाने की जिद करते हैं।
ऐसे में डीजे या साउंड वाले के पास आवाज बढ़ाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं रह जाता, जो स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। जिला प्रशासन ने इस संबंध में नियम तय किए हैं और कार्रवाई भी होती है, लेकिन घर वालों की जिद के चलते डीजे या साउंड वालों को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
साउंड प्रेशर मिड व बेस से थर्रा उठता है क्षेत्र
कांवड़ यात्रा में कई लोग साउंड प्रेशर मिड लगाते हैं, जिससे आवाज बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। बेस बढ़ाने से आसपास का क्षेत्र थर्रा उठता है। इस तरह की हरकतें लोगों के लिए घातक हैं।
डीजे का काम बंद कर चुके शमीम खान ने बताया कि अब सभी बड़े सभागारों में साउंड सिस्टम लग गए हैं, जिससे रोजगार सिमट रहा है। नई तकनीक के चलते डीजे या साउंड वालों को काम कम मिल रहा है।
