BJP नेता के भाई की दर्दनाक हत्या: रात को पानी की टंकी पर सोने गए थे बलराम, सुबह गेट पर मिली लहूलुहान लाश
बरेली में भाजपा जिला उपाध्यक्ष राहुल दीक्षित के चचेरे भाई बलराम दीक्षित की पानी की टंकी परिसर में गला रेतकर ...और पढ़ें

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भूमि विवाद समेत कई बिंदुओं पर जांच कर रही पुलिस, अज्ञात पर रिपोर्ट
संवाद सूत्र, भमोरा (बरेली)। भाजपा के आंवला जिला उपाध्यक्ष राहुल दीक्षित के चचेरे भाई बलराम दीक्षित की गला रेतकर हत्या कर दी गई। सोमवार को पुलिस ने शक के आधार पर नशे के आदी युवक पूछताछ की तो मामला उलझ गया। उसने डंडे से प्रहार करने एवं तीन अन्य लोगों के साथ में होने की बात कही, मगर पुष्टि नहीं हो सकी। अब पुलिस भूमि विवाद समेत कई अन्य बिंदुओं पर जांच कर रही है।
भमोरा के डप्टा श्यामपुर गांव निवासी अविवाहित बलराम दीक्षित अपने भतीजे आशुतोष दीक्षित के साथ रहते थे। आशुतोष ने बताया कि उनके पास ग्राम पंचायत की पानी की टंकी का संचालन एवं देखरेख का जिम्मा है।
वह दो दिन से बुखार आने के कारण रात में टंकी की रखवाली करने नहीं जा सके। ऐसे में रविवार रात चाचा बलराम टंकी परिसर में सोने चले गए। सोमवार सुबह टंकी परिसर के मुख्य द्वार पर उनका लहूलुहान शव मिला।
किसी ने धारदार हथियार से उनका गला रेता था। पुलिस के अनुसार, आरंभिक जांच में पता चला कि रविवार देर शाम नौरंगपुर निवासी हरिओम टंकी परिसर में चारपाई पर लेट गया था।
इस पर बलराम ने आपत्ति जताई, पड़ोस में पंचमुखी हनुमान मंदिर के महांत हरि गिरि से भी शिकायत की। नोकझोंक होने पर नशे में धुत हरिओम वहां से निकलकर गांव में घूमता रहा।
रात को गश्त कर रहे दारोगा व सिपाहियों ने भी उसे रोककर पूछताछ की, मोबाइल फोन से फोटो भी खींचा था। सोमवार को बलराम की हत्या की सूचना मिलने पर सबसे पहले हरिओम से ही पूछताछ हुई, वह उस समय भी नशे में था।
उसने बलराम पर डंडे से प्रहार करने एवं अन्य हमलावरों के नाम भी बताए। एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने बताया कि उससे पूछताछ चल रही है। उसने जिन तीन लोगों के नाम बताए, उनकी तलाश भी की जा रही है।
आशुतोष दीक्षित ने बताया कि उनके चचेरे चाचा पूर्व प्रधान राहुल दीक्षित भाजपा के आंवला जिला उपाध्यक्ष हैं। चाचा बलराम 10 वर्ष से उनके साथ रहते थे। उन्होंने अपने हिस्से की पांच बीघा भूमि भी उन्हें दे दी।
ढाई बीघा चाचा ने अपने पास रखी थी, इसको लेकर परिवार के सदस्य से उनका विवाद चल रहा था। कुछ महीने पहले बलराम की जमीन पर दूसरे पक्ष ने मिट्टी डाली, तब भी झगड़ा हुआ था।
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