बरेली में बेसमेंट की मनमानी खोदाई से भवनों में आई दरार, बीडीए ने दिखाई सख्ती, कैंसिल किया नक्शा
बरेली के चौपुला रोड पर व्यावसायिक भवन के बेसमेंट की खोदाई से आसपास के भवनों में दरारें आ गईं। बीडीए ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददााता, बरेली। शहर के चौपुला रोड पर शुक्रवार को व्यवसायिक भवन के बेसमेंट की खोदाई के दौरान आसपास के भवनों झुकने का क्रम रविवार को भी जारी रहा। इसको लेकर अभियंताओं के निगरानी में भवन को गिरने से बचाने के लिए सपोर्टिंग वाल का कार्य जारी रहा।
उधर, बीडीए ने भवन के चालान के बाद अब मानचित्र निरस्त (कैंसिल) कर दिया। इसके लिए भवन के लिए मनमानी ढंग से की गई खोदाई, सेटबैक का दो मीटर का हिस्सा नहीं छोड़ना और सुरक्षात्मक प्रबंध में कमी समेत कई अन्य बिंदुओं को आधार बनाया गया है।
पीड़ित भवन स्वामी विमलेश कुमारी ने निर्माणकर्ता वेद प्रकाश अग्रवाल के विरुद्ध विधिक कार्रवाई को कोतवाली में शिकायती पत्र दिया है। कहा कि, वेदप्रकाश अग्रवाल द्वारा 600 वर्गमीटर में व्यवसायिक भवन के गुरुवार रात्रि में बेसमेंट की खोदाई की गई इससे शुक्रवार को उनके तीन मंजिला भवन में दरारें आ गईं, जो लगातार बढ़ता ही जा रहा।
कहा कि आपत्ति के बाद भी निर्माणकर्ता मौन रहे और कार्य जारी रखा। पूरे प्रकरण में विधिक कार्रवाई की मांग की है। इन सबके बीच, बीडीए ने भी घटना के बाद तत्काल निर्माण पर लगी रोक की कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए वेद प्रकाश के तीन मंजिला व्यवसायिक भवन के नक्शा को कैंसिल कर दिया है।
बीडीए के संयुक्त सचिव दीपक कुमार ने बताया कि शुक्रवार को घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-27 के तहत अग्रिम आदेश तक भवन निर्माण पर रोक लगा दिया था, जिसके क्रम में कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए मानचित्र को निरस्त कर दिया गया है।
संपत्ति की हानि पर बीएनएस में कार्रवाई का प्रविधान
जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता गिरिवर सिंह कन्नौजिया ने चौपुला चौराहे के पास बेसमेंट की खोदाई से आसपास के भवनों को पहुंचे क्षति पर प्रतिक्रिया व्यक्त किया। कहा कि, इस तरह की गतिविधि पर अपराधिक केस बनता है।
ऐसे प्रकरण में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) -2023 की धारा-324 (4) या 324 (3) के तहत निर्माणकर्ता के विरुद्ध विधिक कार्रवाई हो सकती है। बेसमेंट का निर्माण अलग-अलग पार्ट में होता है। सेटबैक नहीं छोड़ने पर तत्काल नक्शा कैंसिल हो जाना चाहिए था।
निर्माण के समय सुरक्षात्मक प्रबंध किया गया है या नहीं, इसकी देखरेख की जिम्मेदारी बीडीए के अभियंताओं की है। नक्शा पास कर देना इतिश्री नहीं है। इस निर्माण की मानटिरिंग करना भी दायित्व है कि स्वीकृत नक्शे के अनुरुप कार्य हो रहा या नहीं।
