बरेली के बाबा वनखंडीनाथ धाम में खुदाई के दौरान मिली 17वीं शताब्दी की प्राचीन ईंटें, रख-रखाव पर उठ रहे सवाल
बरेली के बाबा वनखंडीनाथ धाम में नए निर्माण के दौरान प्राचीन नींव और दीवारों को ध्वस्त किया गया। खुदाई में ...और पढ़ें

वनखंडी नाथ मंदिर के गर्भ गृह के पास हो रही खोदाई
HighLights
बाबा वनखंडीनाथ धाम में नए निर्माण के दौरान प्राचीन नींव ध्वस्त।
खुदाई में 17वीं शताब्दी की प्राचीन ईंटें मिलने से हड़कंप।
पुरातत्व विभाग की निगरानी और संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल।
जागरण संवाददाता, बरेली। जोगी नवादा स्थित बाबा वनखंडीनाथ धाम में प्राचीन मंदिर में गर्भ गृह के पास की नींव और दीवारों को ध्वस्त कर बाहर नया निर्माण कराया गया है। मंदिर के बाहर विशाल गुंबद और भव्य संरचना तैयार हो चुकी है। वहीं, पुराने अवशेष हटाए जाने और खोदाई के दौरान मिली प्राचीन ईंटों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, परिसर में करीब 17वीं शताब्दी की बताई जा रही ईंटें और अन्य प्राचीन सामग्री मिली है। इसके बावजूद मौके पर पुरातत्व विभाग की निगरानी में कार्य नहीं कराया गया।

बाबा वनखंडीनाथ धाम नाथ नगरी के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव और द्रौपदी इस क्षेत्र से गुजरे थे। उस समय यह इलाका पांचाल राज्य का हिस्सा माना जाता था। मान्यता है कि द्रौपदी ने यहां शिवलिंग स्थापित कर भगवान शिव की तपस्या की थी। उनके पिता राजा द्रुपद भी इस शिवलिंग की पूजा करते थे। प्राचीन समय में क्षेत्र के वनखंड से घिरे होने के कारण मंदिर का नाम वनखंडीनाथ पड़ा।
लोगों का दावा- दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है। यह भी मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर और शिवलिंग को खंडित करने का प्रयास किया था, लेकिन सफल नहीं हो सका।

मंदिर परिसर में निर्माण के दौरान पुराने अवशेष हटाए जाने की बात सामने आई है। खोदाई में निकली ईंटों को कुछ स्थानीय लोग पूजा के लिए अपने घर भी ले गए। लोगों का कहना है कि मंदिर की ऐतिहासिकता को देखते हुए निर्माण से पहले पुरातात्विक महत्व की सामग्री का संरक्षण कराया जाना चाहिए था।
फिलहाल मंदिर के बाहर नया निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। रंगाई और फिनिशिंग का काम चल रहा है। मंदिर के महंत सुधीर नारायण गिरी बताया कि अंदर से निकले अवशेष अपने पास सुरक्षित रखे जा रहे हैं। कई पुरानी ईंटे आदि निकली हैं।
