अग्निवीर मेडिकल पास कराने के नाम पर ठगी, डिफेंस एकेडमी का संचालक समेत 5 गिरफ्तार; ऐसे फंसाते थे जाल में
बरेली में अग्निवीर भर्ती में फिजिकल और मेडिकल पास कराने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, बरेली। अग्निवीर भर्ती में अभ्यर्थियों को फिजिकल, मापतौल और मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर रुपये वसूलने वाले गिरोह का कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने राजफाश किया है। पुलिस ने जाट रेजीमेंट सेंटर के हरभजन गेट के पास से गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया।
इनके पास से एक मोटरसाइकिल, एक स्कूटी, छह मोबाइल फोन और 9,100 रुपये बरामद हुए हैं। आरोपितों के मोबाइल फोन में अभ्यर्थियों से भर्ती कराने के नाम पर हुई चैटिंग, मेडिकल संबंधी दस्तावेजों के स्क्रीनशाट और आनलाइन लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक, 23 सितंबर को मिलिट्री इंटेलिजेंस से सूचना मिली कि जाट रेजीमेंट सेंटर में चल रही अग्निवीर भर्ती में कुछ लोग अभ्यर्थियों को मापतौल और मेडिकल में पास कराने के नाम पर रुपये वसूल रहे हैं।
सूचना पर पुलिस टीम मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ हरभजन गेट पहुंची। वहां पांच संदिग्ध व्यक्ति बातचीत करते मिले, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ लिया गया।
आरोपितों ने अपना नाम प्रदीप कुमार शर्मा निवासी भले साही, इस्लामनगर, बदायूं, विशाल यादव निवासी चुरहा नबधिया अलीगंज, राजवीर उर्फ कैलाश निवासी सिकरौरा भूर, धनारी संभल, धर्मेंद्र सिंह निवासी सिथौली, इस्लामनगर बदायूं और नूर अहमद निवासी कांधरपुर कैंट के रूप में हुई।
तलाशी में प्रदीप के पास मोबाइल व 600 रुपये, विशाल और राजीव के पास मोबाइल, धर्मेंद्र के पास मोबाइल व 8,500 रुपये तथा नूर अहमद के पास दो की-पैड मोबाइल बरामद हुए। पू
छताछ में प्रदीप ने बताया कि वह चौबारी में दीक्षित डिफेंस एकेडमी चलाता है और अग्निवीर भर्ती के लिए फिजिकल की तैयारी कराता है। वह ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था, जिन्हें मापतौल या मेडिकल में अनफिट होने की आशंका रहती थी।
अभ्यर्थियों को पूर्व की भर्तियों के परिणाम और मेडिकल में अनफिट अभ्यर्थियों को फिट कराने संबंधी दस्तावेज दिखाकर विश्वास में लिया जाता था।
वहीं विशाल यादव का कहना था कि, उसने लखनऊ सेंटर में मेडिकल कोर में करीब डेढ़ साल सफाईकर्मी के रूप में काम किया था। इसी कारण वह अभ्यर्थियों को अपने प्रभाव में लेता था।
इसके बाद उसने अपने रिश्तेदार राजवीर उर्फ कैलाश को भी इस काम में शामिल कर लिया। राजवीर के परिचित धर्मेंद्र सिंह और धर्मेंद्र के संपर्क में रहने वाले नूर अहमद को भी गिरोह में शामिल किया गया। नूर अहमद खुद को मिलिट्री अस्पताल में कारपेंटर बताकर अधिकारियों से पहचान होने और अभ्यर्थियों का चयन कराने का दावा करता था।
अन्य लोगों के भी नाम प्रकाश में आए
पूछताछ में धर्मेंद्र ने एक अन्य व्यक्ति आसिफ निवासी धनौरा, अमरोहा का भी नाम बताया। पुलिस के मुताबिक आरोपित अभ्यर्थियों के सामने आसिफ खुद को सेना का अधिकारी और नूर अहमद को मिलिट्री अस्पताल में कार्यरत कारपेंटर बताकर पेश करते थे।
जबकि सेना के अधिकारियों या मिलिट्री अस्पताल के डाक्टरों से उनकी कोई पहचान नहीं थी। आरोपितों के अनुसार जिन अभ्यर्थियों का चयन अपने आप हो जाता था, उनसे भी रुपये लेकर आपस में बांट लिए जाते थे।
फोन से मिले कई स्क्रीनशाट
पुलिस ने आरोपितों के मोबाइल फोन चेक किए तो धर्मेंद्र, राजवीर और विशाल के मोबाइल में अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर हुई व्हाट्सएप चैट और आनलाइन लेनदेन के साक्ष्य मिले।
विशाल के फोन में अभ्यर्थियों के आरएमडीएस नंबर, मेडिकल में पूर्व में अनफिट अभ्यर्थियों को फिट कराने से संबंधित बातचीत, मेडिकल डिसेबिलिटी के दस्तावेज और प्रवेश पत्रों के स्क्रीनशाट भी मिले।
