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बुखार से कांपता शरीर फिर भी नहीं थमे कदम, बरेली अग्निवीर भर्ती में इन युवाओं के जुनून ने रचा इतिहास

Published: Thu, 17 Sep 2026 05:24 PM (IST)

बरेली के जाट रेजिमेंट सेंटर में 14 से 30 सितंबर तक चल रही अग्निवीर भर्ती में 12 जिलों के युवाओं ...और पढ़ें

जाट रेजिमेंट सेंटर में अग्निवीर भर्ती में दौड़ते अभ्यर्थी। सौ. सेना

जाट रेजिमेंट सेंटर में अग्निवीर भर्ती में दौड़ते अभ्यर्थी। सौ. सेना

HighLights

  1. दौड़ में सफल होने वाले फर्रूखाबाद, लखीमपुर समेत अन्य जिलों के युवाओं ने साझा किए अनुभव

नीलेश प्रताप सिंह, बरेली। बुखार से तपता शरीर... कदमों में कमजोरी मगर, मन में राष्ट्रसेवा का सपना। भारतीय सेना की वर्दी पहनने का इरादा लिए तमाम युवाओं का जोश बुखार भी नहीं रोक पाया। बुधवार को जाट रेजिमेंट सेंटर में हुई अग्निवीर भर्ती में बुखार (वायरल) से पीड़ित कई युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। देश सेवा का जज्बा लिए अभ्यर्थियों ने दौड़ पूरी की और अग्निवीर बनने की पहली सफलता हासिल की।

जाट रेजिमेंट सेंटर में 14 से 30 सितंबर तक चल रही अग्निवीर भर्ती में बरेली, लखीमपुर, बलरामपुर, शाहजहांपुर, हरदोई, संभल समेत 12 जिलों के अभ्यर्थी भाग ले रहे हैं।

भर्ती के पहले दो दिन अग्निवीर टेक्निकल व ट्रेड्समैन श्रेणी में सफल होने वाले लखीमपुर खीरी, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर व बदायूं के कई अभ्यर्थी बुधवार को स्वास्थ्य परीक्षण को पहुंचे।

देर शाम तक कई अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया के बीच उनके स्वजन गेट के बाहर इंतजार करते रहे मगर, उनके चेहरे पर खुशी के भाव साफ झलक रहे थे।

दौड़ में सफल होने वाले युवाओं में कई युवाओं ने बताया कि वह मंगलवार को दौड़ में शामिल हुए थे लेकिन उस समय बुखार से ग्रसित थे। शरीर जवाब दे रहा था, लेकिन मन में राष्ट्र सेवा के लिए सेना की वर्दी पहनने का जुनून था।

उन्होंने मैदान में उतरने का फैसला किया। दौड़ शुरू हुई तो हर कदम चुनौती था, मगर मन में एक ही लक्ष्य था सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करना। इसी संकल्प ने उन्हें मंजिल तक पहुंचा दिया।

उल्लेखनीय है कि 14 व 15 सितंबर को अग्निवीर टेक्निकल में भाग लेने वाले 1392 युवाओं में 846 दौड़ में सफल हुए। अग्निवीर ट्रेड्समैन में 587 उम्मीदवारों में 403 ने दौड़ में सफलता प्राप्त की। बुधवार को बहराइच व लखीमपुर खीरी के युवाओं ने अग्निपरीक्षा दी।

दौड़ में सफल होने वाले अभ्यर्थी बोले-कड़ी मेहनत का नहीं कोई विकल्प

मैने तीन माह पहले सेना में जाने के लिए तैयारी शुरु की थी। सब कुछ सही था मगर दो-तीन दिन से बुखार अधिक होने के चलते हिम्मत जवाब दे रहा था, मगर इसके बाद भी अग्निवीर बनने के लिए जाट सेंटर पहुंचा। परिणाम स्वरूप चौथे ग्रुप में सफल हुए। मैं सिर्फ यही कहूंगा कि कड़ी मेहनत और इच्छाशक्ति के दम पर किसी भी मंजिल को पाया जा सकता है। - सुमित कुमार, बस्ती नगला, शाहजहांपुर

दो माह से तैयारी कर रहे थे। बुखार के बाद भी दौड़े और सफलता प्राप्त की। उम्मीद थी फर्स्ट आऊंगा लेकिन सेकेंड आया। अपनी सफलता का श्रेय स्वजन के भरोसे और खुद के मेहनत को देते हैं। मैं युवाओं को यही कहूंगा कि वह हिम्मत न छोड़ें, सफलता जरूर उनके कदम को चूमेगी। - सामोद यादव, महमदगंज, फर्रुखाबाद

कई माह की कड़ी मेहनत के दम पर दौड़ निकल गया है। पिताजी का मार्गदर्शन लगातार काम आता है। सेना में जाकर राष्ट्र की सेवा ही एकमात्र ध्येय है। ईश्वर ने आशीर्वाद दिया है। युवाओं को अपनी सफलता के लिए निरंतर प्रयासरत रहना होगा। कोई भी मंजिल ऐसा नहीं जिसे पाया नहीं जा सकता, बशर्ते उसके लिए आप पूरी ईमानदारी से मेहनत जारी रखें। - गुरजिंदर सिंह

बाबाजी सेना मे थे, उन्हें देखकर हमेशा सेना में जाने का सपना देखा। बीटेक में एडमिशन लिया लेकिन सेना में जाने के लिए हमेशा मेहनत जारी रखा। 14 सितंबर को अग्निवीर टेक्निकल ट्रेड में दौड़ में अव्वल आए हैं। पिताजी किसानी करते हैं। छोटा भाई भी सेना में जाएगा। देश की सेवा करने का एक मात्र सपना है, जो अब पूरा हो रहा है। - आशुतोष सिंह, आजाद नगर, बदायूं

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