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बरेली के 300 बेड अस्पताल के बदले दिन: अब PPP मोड पर मिलेगा हाईटेक इलाज; वेंटिलेटर से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक की सुविधा

Published: Wed, 28 Oct 2026 04:59 PM (IST)

बरेली का 300 बेड वाला अस्पताल अब पीपीपी मोड पर संचालित होगा, जिससे मरीजों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। शासन ...और पढ़ें

300 बेड अस्पताल

300 बेड अस्पताल

HighLights

  1. 2022 से जिला अस्पताल के एक हिस्से के रूप में संचालित की जा रही है ओपीडी

  2. वेंटिलेटर, आक्सीजन युक्त बेड, एचएफएनसी, बाईपैप, पीकू का हो सकेगा उपयोग

जागरण संवाददाता, बरेली। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार 300 बेड अस्पताल के दिन अब बहुरने की उम्मीद जगी है। मंगलवार को शासन स्तर से अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित करने की मंजूरी मिल गई। इससे शहर और आसपास के जिलों के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने का रास्ता साफ होगा।

अस्पताल में धूल फांक रहे वेंटिलेटर, आक्सीजन युक्त बेड, एचएफएनसी, बाईपैप, पीकू, डिलीवरी और आपरेशन थिएटर के उपकरणों का उपयोग हो सकेगा। आक्सीजन प्लांट, जनरेटर और अग्निशमन संसाधनों का लाभ भी मरीजों को मिल सकेगा।

निर्माण के बाद अस्पताल में वर्ष 2022 से जिला अस्पताल के एक हिस्से के रूप में ओपीडी शुरू की गई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. इंतजार हुसैन ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में पद का सृजन शून्य है।

यहां नेत्र, डेंटल सर्जन, एआरवी, सीटी स्कैन, पैथोलाजी की सुविधा है। जनरल ओपीडी में दो चिकित्सक परामर्श देते हैं। प्रतिदिन लगभग 700 मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं।

विशेषज्ञों के लिए मरीजों को सर्जरी, हड्डी, स्त्री एवं प्रसूति रोग और बाल रोग संबंधी इलाज के लिए महाराणा प्रताप जिला संयुक्त चिकित्सालय ही जाना पड़ता है। अस्पताल को पूर्ण रूप से संचालित कराने व इसका ट्रामा सेंटर के रूप संचालन करने के लिए कई बार जनप्रतिनिधि शासन स्तर पर पत्र लिख चुके हैं।

घायलों को दिल्ली व लखनऊ ले जाने में लगता है समय

आसपास के जिलों के लिए शहर मेडिकल हब है। ऐसे में कई बार जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल का निरीक्षण कर ट्रामा सेंटर की जरूरत भी शासन तक पहुंचाई। कहा कि गंभीर रूप से घायल मरीजों को दिल्ली या लखनऊ ले जाने में अधिक समय बर्बाद होता है।

300 बेड अस्पताल को ही हाइटेक सुविधाओं व संसाधन से परिपूर्ण किया जाए, जिससे मरीजों को दूर तक दौड़भाग न करनी पड़े और उन्हें समय पर उपचार मिल सके।

मानव संसाधन के लिए भेजी जा चुकी फाइल

जिला स्तर से मानव संसाधन के लिए शासन को तीन वर्ष पूर्व भी फाइल भेजी गई थी। इसमें 04 आई सर्जन, 04 बाल रोग विशेषज्ञ, 04 रेडियोलाजिस्ट, 03 चेस्ट फिजिशियन, 06 स्त्री रोग विशेषज्ञ की मांग की गई है।

इसके अलावा 02 न्यूरो सर्जन, 02 यूरो सर्जन, 02 न्यूरो फिजिशियन, 02 नेफ्रोलाजिस्ट, 30 फार्मासिस्ट, 12 लैब टेक्नीशियन, 03 हृदय रोग विशेषज्ञ, 03 ईएनटी सर्जन, पांच रेडियोलाजिस्ट, तीन ईसीजी टेक्नीशियन, 02 फिजियोथेरेपिस्ट समेत अन्य स्टाफ की मांग की गई।

कई बार हो चुकी चोरी

अस्पताल का पूर्ण रूप से संचालन नहीं शुरू हो पाने के कारण यहां कई बार चोरी की घटनाएं चोरी हो चुकी हैं। परिसर में बने आवास से लेकर ओपीडी के बाहर पड़ी कुर्सियां, पंखे, टोटी, एसी वायर आदि की चोरी हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जा सकी। अस्पताल में करोड़ों रुपये के उपकरण धूल फांक रहे हैं।

मेडिकल कालेज की संभावना

स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में संसाधन उपलब्धता पर्याप्त लेकिन भूमि कम मिली। विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल कालेज में अस्पताल भी संचालित होता है।

तीन सौ बेड अस्पताल में इसके लिए जगह है, लेकिन मेडिकल की पढ़ाई के लिए एकेडमिक ब्लाक, सभागार व अन्य कार्यालय के लिए जमीन कम पड़ेगी।

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