बदायूं, जागरण संवाददाता। Badaun Honour Killing Verdict : आंखों में नींद और सोने की तैयारी कर रहे पिता को जब पता चला कि उनके बेटे की हत्या के दोषियाें को फांसी की सजा हो गई है तो वह अवाक रह गया। बोला- सच कह रहे हो क्या। मुझे तो पता ही नहीं था कि तारीख भी है। वकील साहब ने भी नहीं बताई।

बोला-हत्यारों काे फांसी की सजा, बेटे के प्यार की जीत है। वह तो शादी करना चाहता था, बिना मतलब में मार दिया। बताया कि मुझे विश्वास था कि इंसाफ जरूर मिलेगा, इसीलिए कर्ज लेकर लड़ाई लड़ता रहा। पप्पूराम ने इसकी जानकारी जब अपनी पत्नी और पांचों बहनों को दी तो उनकी आंखों में भी खुशी के आंसू आ गए।

पप्पू राम ने बताया कि 14 मई 2017 को ही गोविंद दिल्ली से घर आया था। वह दिल्ली में पत्थर पाॅलिश का काम करता था। उसके घर आने पर सब खुश थे। उसने बताया था कि आशा के पिता ने उसे बात करने के लिए बुलाया है। सभी को लग रहा था कि अब जल्द गोविंद की शादी हो जाएगी।

लेकिन किसी को क्या पता था कि वह लोग जिन खुशियों के आने के सपने देख रहे हैं वह कुछ ही देर में सबसे बड़ा दुख लेकर आने वाला है। पप्पू राम के मुताबिक वह उस समय गांव बाहर थे। लेकिन गांव के लोगों ने बताया था कि गोविंद के घर के अंदर जाने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया था।

इसके बाद गोविंद की चीखें सुनाई दीं और बाद में आशा की भी चीखने की आवाज आई। उनके पड़ोस में रहने वाली महिला ने ही आशा के सौतेले पिता को उसका शव खींचकर बाहर लाते देखा था। इसके बाद पुलिस बुलाई गई। किशनलाल के दरवाजे पर बेटी आशा का शव पड़ा था और अंदर खून से लथपथ गोविंद का शव था।

दोनों पर बेरहमी से वार किए थे। जैसे हत्यारे जान लेने के इरादे से ही बैठे हों। पुलिस के आने पर ही पप्पू राम भी पहुंच गया था। बेटे का शव देख वह भी कांप गया था।

सबसे बड़ा था गोविंद

गोविंद अपने माता पिता का सबसे बड़ा बेटा था। उसके बाद पांच बेटियां हुईं थी। गोविंद के रहते उनके माता पिता काे उससे आस थी। लेकिन उसकी मृत्यु के बाद वह भी टूट गई।

गोविंद के पिता पप्पू राम ने बताया कि एक बेटी की शादी पिछले साल कर दी है। चार बेटियां अभी हैं। उनके पालन पोषण के लिए मजदूरी करता है। जैसे तैसे कट रही। जाे पूंजी थी वह इस मुकदमे में खर्च हो गई।

फैसला सुनाया और तोड़ दी कलम

जिला जज पंकज कुमार अभी कुछ दिन पहले ही जिले में आए हैं। गुरुवार को सिविल बार में उनका स्वागत भी हुआ। इसके बाद उन्होंने कोर्ट पहुंच कर इस मामले की सुनवाई की और निर्णय सुनाया। चारों दोषियों को सजा के साथ 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी दिया।

इसकी आधी धनराशि वादी को देने के आदेश दिए हैं। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायााधीश पंकज अग्रवाल ने कलम तोड़ दी। जिले में आने के कुछ दिन के भीतर ही इतनी बड़ी सजा सुनाने के बाद अधिवक्ताओं में काफी चर्चा भी रही।

नौ लोगों को दिलवा चुके फांसी की सजा

एडीजीसी क्राइम अनिल कुमार राठौर ने इस पूरे मामले में पैरवी की। उन्होंने बताया कि इस मामले में कई गवाहों के बयान हुए। लेकिन जिन लोगों ने किशनलाल व उनके स्वजन को शव बाहर लाते देखा, वही पूरे मामले में मुख्य साक्ष्य था। उन्होंने बताया कि इस मामले में वादी पक्ष काफी कमजोर भी था।

उसे दबाव में लेने की भी कोशिश की गई, लेकिन वह डटा रहा। बता दें कि एडीजीसी अनिल कुमार राठौर अब तीन मामलों में अपनी पैरवी और कोर्ट में जिरह के दम पर नौ दोषियों को फांसी की सजा दिलवा चुके हैं।

Edited By: Ravi Mishra