40 साल पहले 150 बोरी चावल की तस्करी में फंसा ड्राइवर; अब चार दशक बाद हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1984 के 150 क्विंटल चावल की अवैध तस्करी मामले में ट्रक चालक अजीज खान की दोषसिद्धि बरकरार रखी है।
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HighLights
1984 चावल तस्करी मामले में अजीज खान दोषी करार।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखी।
40 साल की देरी पर सजा अवधि घटाई गई।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 1984 में 150 क्विंटल चावल की अवैध तस्करी मामले में ट्रक चालक अजीज खान की दोषसिद्धि बरकरार रखी है। हालांकि मुकदमे में करीब 40 साल की देरी और अभियुक्त की उम्र को देखते हुए अदालत ने छह महीने की सजा घटाकर अब तक काटी गई अवधि तक सीमित कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय ने दिया है।
आठ फरवरी 1984 को भोजीपुरा थाने के उपनिरीक्षक किशन लाल को सूचना मिली कि 150 बोरी चावल अवैध बिक्री के लिए धौराटांडा की ओर से कोलकाता ले जाया जा रहा है। पुलिस ने थाने के गेट पर घेराबंदी की और ट्रक को रोककर तलाशी ली। ट्रक अजीज खान चला रहा था। उनके साथ अलाउद्दीन उर्फ अकील अहमद और पूरन भी थे।
पुलिस ने चावल जब्त कर रिकवरी मेमो और चेक रिपोर्ट किया तैयार
तलाशी में करीब एक-एक क्विंटल की 150 बोरियां मिलीं। चावल के परिवहन के लिए कोई लाइसेंस या कागजात नहीं था। पूछताछ में चावल को कोलकाता में बेचने के लिए ले जाने की बात कही। पुलिस ने चावल जब्त कर रिकवरी मेमो और चेक रिपोर्ट तैयार की।
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उपनिरीक्षक पीएस यादव ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। बरेली के स्पेशल जज ने 20 दिसंबर 1985 को अजीज खान को छह महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट में इसी फैसले को अपील में चुनौती दी गई थी।
