जेएनएन, बरेली : हैदराबाद और उन्नाव की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किए जा रहे हैं। इनकी हकीकत इसी बात से समझा जा सकता है कि महिलाओं को रेस्क्यू करने वाली 181 मोबाइल वैन पांच माह से इसलिए खड़ी है क्योंकि विभाग के पास डीजल का बजट नहीं है।

आशा ज्योति केंद्र पर महिलाओं के लिए 181 हेल्पलाइन शुरू की गई थी। इसमें फोन पर शिकायत करने के साथ महिलाओं को रेस्क्यू करने की भी सुविधा थी। हर सेंटर पर एक रेस्क्यू वैन रखी गई थी। इसका मकसद बेसहारा महिलाओं को रेस्क्यू करना था। साथ ही उन महिलाओं को भी मदद की जाती थी जिसकी लोग 181 हेल्पलाइन पर जानकारी देते थे।

वैन में एक पायलट के साथ चार लोगों का स्टाफ नियुक्त किया गया था। जनवरी से शुरू यह सेवा जुलाई तक तो चली लेकिन, फिर बजट और रखरखाव के अभाव में दम तोड़ गई। न वैन के लिए डीजल का बजट आया और न ही स्टाफ का वेतन मिला। हालत यह है कि आशा ज्योति केंद्र में खड़ी यह वैन कबाड़ में तब्दील हो रही है। शिकायतों के निस्तारण के लिए अब महिला कल्याण विभाग पुलिस पर निर्भर रहता है। 

कैसे हो महिलाओं की सुरक्षा :

05 माह से डीजल न होने के चलते खड़ी है 181 मोबाइल वैन। 

33 मामलों में जनवरी से जून तक मोबाइल वैन ने किया रेस्क्यू।

नौं शिकायतें अभी भी लंबित : इस साल 181 हेल्पलाइन नंबर पर 493 शिकायतें आई। इनमें से 484 शिकायतों को निस्तारित किया गया। जबकि नौ ऐसी शिकायतें हैं जिनमें प्रक्रिया चल रही रही है।

ऐसे होता है समाधान : शिकायत आने पर पीड़िता की काउंसिलिंग की जाती है। पुलिस कार्रवाई की जरूरत होने पर थाने में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई जाती है। चिकित्सीय सुविधा के साथ ही कौशल विकास के तहत महिलाओं को ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाया जाता है।

अगर इस तरह का मामला है तो इसकी संबधित विभाग से जानकारी ली जाएगी और जांच की जाएगी कि क्यों रेस्क्यू वैन नहीं चल रही है। नितीश कुमार, डीएम

 

Posted By: Abhishek Pandey

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस