जेएनएन, बरेली : फसल अवशेष यानी पराली प्रबंधन को समस्या मानते हुए देश के तमाम हिस्सों मेें किसान पराली जलाते हैैं। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) के कृषि वैज्ञानिकों ने पराली का खेत में ही प्रबंधन करने के लिए कुछ कृषि यंत्रों की सिफारिश की है। जिससे किसान पराली जलाकर प्रदूषण को बढ़ाने की बजाए अपने खेत की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैैं। इनमें सुपर एसएमएस, मल्चर, चॉपर कम श्रेडर, हैप्पी सीडर जैसे कई यंत्र शामिल हैैं।

सुपर एसएमएस : सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (सुपर एसएमएस) युक्त कंबाइन से निकलने वाली पराली एक जगह इकट्ठी नहीं होती। बल्कि इसे 12 से 16 फीट क्षेत्र में फैला देती है। इससे खेत में अन्य कृषि यंत्रों का उपयोग आसान हो जाता है। अभी तक धान कटाई के लिए सामान्य कम्बाइन का उपयोग हो रहा। जो प्रतिबंधित हो चुका है।

हैप्पी सीडर यंत्र : सुपर एसएमएस कंबाइन से कटे खेत में बिना जुताई किए सीधे बुआई के लिए हैप्पी सीडर यंत्र का उपयोग होता है। दरअसल, हैप्पी सीडर में जीरो टिल फर्टी सीड ड्रिल के हर खुरपे के आगे कटर ब्लेड (फ्लायल) लगे रहते हैं। जो हर लाइन के आगे आने वाले ठूठों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पलवार के रूप में बिछा देता है। खेत समतल और नम होने पर इसका उपयोग ज्यादा बेहतर है। इससे खेत में सूक्ष्म जीवों की मात्रा भी कम नहीं होती। हैप्पी सीडर 40 से 45 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर से छह से आठ एकड़ खेत की बुवाई रोज कर सकता है।

जीरो टिल फर्टी सीड ड्रिल : हाथ से कटी धान की फसल में बिना जुताई करे जीरो टिल फर्टी सीड ड्रिल से सीधे बुवाई की जा सकती है। इसके लिए खेत का समतल होना तथा खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। खेत की तैयारी तथा सिंचाई पर आने वाली लागत की बचत होती है तथा खरपतवार कम होती है।

श्रब मास्टर का करें प्रयोग : कंबाइन से कटाई के बाद श्रब मास्टर बचे हुए ठूंठों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में एकसमान बिखेरता है। यह 40 से 45 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर से छह से आठ एकड़ खेत की पराली को काट सकता है। इसका प्रयोग करने के बाद खेत को शुष्क या गीली विधि से अगली फसल की बुवाई के लिए तैयार करते हैैं।

रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ : यह डबल प्रेशर के 40 से 45 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर से चलता है। श्रब मास्टर, मल्चर या चॉपर कम श्रेडर से काटकर एक समान बिखरे ठूंठ को रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ के जरिए मिट्टïी के नीचे दबाया जाता है। यह पराली दस से 15 दिन में पूरी तरह गल जाती है। इसके बाद रोटावेटर के प्रयोग से मिट्टी के नीचे दबा देते हैं। मिट्टी में दबने के बाद पराली 10 से 15 दिन में पूर्ण रूप से गल जाती है। इसके बाद रोटावेटर का प्रयोग कर खेत गेहूं की बुवाई के लिए तैयार हो जाता है।

रोटावेटर से ऐसे करें निदान : श्रब मास्टर, मल्चर या चॉपर कम श्रेडर का प्रयोग करने के 10 से 15 दिन बाद रोटावेटर से जुताईं करके सीड ड्रिल से गेहूं की बुवाई होती है। अगर श्रब मास्टर, मल्चर या चॉपर कम श्रेडर आदि न हों तो पराली वाले खेत में हल्का पानी भरकर रोटावेटर से कंधेर कर देते हैं। इससे पराली गीली मिटटी में दब सी जाती है। इसके बाद गलने में 15 से 20 दिन लगता है। फिर से रोटावेटर से जुताई कर खेत में सीड ड्रिल से बुवाई कर सकते हैैं। 

Posted By: Abhishek Pandey

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