बरेली, जेएनएन। गेहूं की फसल से खाली हो रहे खेत में किसान ढ़ैंचा की बुआई करें। खाली खेत की सिंचाई व जुताई करके तैयार कर लें। 25 अप्रैल तक बुआई कर देंगे तो अच्छा रहेगा। ढ़ैचा बोकर उसकी पलटाई करेंगे तो मिट्टी में जीवांश कार्बन सहित अन्य तत्वों में वृद्धि होगी। जीवांश कार्बन अत्यंत कम होने से उपज प्रभावित हो रही है।

जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि खेत में ढैचा पलटकर हरी खाद बनाने के लिए 25 अप्रैल तक बुआई अवश्य कर दें। किसान गेहूं से खाली खेत की सिंचाई कर मिट्टी थोड़ा नम रहे तभी जुताई कर दें। फिर उसमें ढ़ैचा की बुआई हल के पीछे कूड़ों में करें। ताकि जून में पहली बारिश होने तक ढैंचा के पौधे दो से ढ़ाई फिट तक के हो जाएं। इन्हें खेत में पलट देने से हरी खाद खाद तैयार हो जाएगी। उन्होंने बताया कि ढैंचा से सन पैदा करने के लिए और उसके डण्ठल से ईंधन का काम लेना हो तो मई के दूसरे सप्ताह से लेकर जून के पहले सप्ताह तक बुआई कर सकते हैं। यह फसल क्रमश: अगस्त के मध्य और सितंबर के मध्य तक तैयार हो जाएगी।

किसान खाली खेतों की करें गहरी जुताई

अप्रैल का महीना धीरे-धीरे आधा बीतने को है। कड़ी धूप हो रही है। ऐसे में किसान खाली खेतों की गहरी जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से कर दें। तेज धूप में हानिकारक खरपतवार व खेतों को नुकसान पहुंचा रहे कांस-कुश नष्ट हो जाएंगे। साथ ही धान की रोपाई के लिए तैयारी भी हो जाएगी।

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