बरेली, जागरण संवाददाता: शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत सामान्य बच्चों की तरह दुर्बल वर्ग के अभिभावकों ने भी उनके बच्चों का कान्वेंट स्कूल में प्रवेश कराने के लिए आवेदन किया था। आरटीई के तहत तीनों चरण में 4158 अभिभावकों ने आवेदन कराया। इसमें 1983 बच्चों को प्रवेश मिला और 918 बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए।

बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से तीन चरण में गरीब बच्चों को प्रवेश दिलाने की व्यवस्था आरटीई अधिनियम के तहत है। जिले में पहले चरण की प्रक्रिया 30 मार्च को संपन्न हुई, जिसमें सत्यापन के बाद 1687 बच्चे पंजीकृत किए गए। लाटरी में 1058 बच्चों को प्रवेश मिला। दूसरे चरण की प्रक्रिया 28 अप्रैल को हुई, जिसमें 780 बच्चों का पंजीकरण हुआ। 569 बच्चों को प्रवेश मिल सका। तीसरे चरण में आवेदन के बाद 434 बच्चों के आवेदन सत्यापित हुए, जिसमें से 356 बच्चों का मनचाहे स्कूल में प्रवेश मिला।

यह है नियम

आरटीई के तहत सभी कान्वेंट स्कूलों में प्री-नर्सरी और कक्षा एक में सीट के सापेक्ष 25 फीसद निश्शुल्क प्रवेश लेने का प्रविधान है। अधिनियम के तहत प्रवेश लेने वाले स्कूलों को बच्चों की फीस शासन की ओर से दी जाती है। यूनिफार्म और किताब के लिए बच्चों को 5 हजार रुपये अलग से दिए जाते हैं। प्रवेश के लिए स्कूल का आवंटन पंजीकरण के बाद लाटरी सिस्टम से किया जाता है।

प्रवेश न मिल पाने का यह है कारण

कई बार शासन की ओर से आरटीई का बजट देरी से पास होने की वजह से स्कूल आर्थिक नुकसान के डर से बच्चों का दाखिला लेने से आनाकानी करते हैं। कुछ स्कूलों ने बीएसए कार्यालय में शासन की ओर से समय से फीस की धनराशि न भेजे जाने की शिकायत की है। पहले, दूसरे और तीसरे चरण में 918 बच्चों को स्कूल में सीट न होने के चलते प्रवेश नहीं मिल सका।

इनका कहना है

आरटीई के तहत नियमानुसार प्रवेश की प्रक्रिया संपन्न हुई है। जिन स्कूलों ने अब तक बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित नहीं किया है उन्हें नोटिस भेजकर प्रवेश के लिए कहा जा रहा है। प्रवेश न लेने वाले स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। -विनय कुमार, बीएसए

Edited By: Aqib Khan