जेएनएन, बरेली : जिले के सभी ब्लॉकों में प्रशिक्षण के नाम पर 20716760 रुपये की धनराशि में गोलमाल डीपीआरओ विनय कुमार को भारी पड़ गया। मंडलीय जांच में 89 लाख के खर्च का हिसाब नहीं मिला। साथ ही भ्रष्टाचार के 12 में आठ आरोप जांच में साबित हुए। मंडलायुक्त ने पद का दुरुपयोग व नियमानुसार धनराशि खर्च नहीं करने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जिस पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

जांच के दौरान पता चला कि सभी ब्लॉकों में ग्राम प्रधान व वार्ड सदस्यों के प्रशिक्षण के नाम पर 13248702 रुपये की रकम खर्च की। जिसके बिल अपने नाम पर काटे। खर्च के बिल बाउचर भी बाद में जमा किए। नियम विरुद्ध सफाईकर्मियों व सचिवों का स्थानांतरण तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की। बिना परमिट पांच गाड़ियों को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में दौड़ाया। जबकि उनका अनुबंध 30 जून 2018 को ही समाप्त हो चुका था। भुता, मझगवां, दमखोदा ब्लॉक के एडीओ पंचायत की मिली भगत से तकनीकी एवं प्रशासनिक मद के खाते में भेजी गई 3214400 रुपये की धनराशि का दुरुपयोग किया गया। 68 सफाईकर्मियों को विभिन्न सरकारी विभागों में संबद्ध कर नियमों का उल्लंघन किया। तत्कालीन डीपीआरओ भी लपेटे में

तत्कालीन डीपीआरओ टीसी पांडेय भी जांच में लपेटे में आए हैं। वरिष्ठ लिपिक शैलेंद्र को वरिष्ठ सहायक पद पर नामित किया। ग्रेड पे बढ़ाने की भी मंडलीय जांच टीम से पुष्टि हुई। जिसे वर्तमान डीपीआरओ के रूप में विनय कुमार ने वर्ष 17-18 में स्वीकृत किया। जबकि वह राजपत्रित अफसर नहीं हैं। बरेली नहीं शाहजहांपुर के निवासी

बरेली जनपद के निवासी होने के आरोप साबित नहीं हुए। सेवा नियमावली में गृह जनपद शाहजहांपुर मिला। जबकि शिक्षा बरेली में हुई। ग्राम पंचायतों की जांच के नाम पर वसूली,पत्‍‌नी को विद्यालय से पहुंचाने व लाने, भ्रष्टाचार में लिप्तता, करोड़ों की संपत्ति अर्जित करना, रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप साक्ष्य के अभाव में खारिज हो गए। एडीओ से विवाद पड़ा भारी

पंचायत उद्योग के प्रबंधक व एडीओ योगेंद्र से विवाद के बाद डीपीआरओ के खिलाफ बिंदुवार शासन से लेकर प्रशासन तक शिकायत की थी। जिस पर मंडलायुक्त व जिला स्तर से जांच शुरू हुई। जांच कमेटी ने अधिकांश आरोपों की पुष्टि करते हुए अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी है। जबकि डीपीआरओ के निरीक्षण में योगेंद्र पर भी लाखों के गबन की पुष्टि हुई। जिस पर सीडीओ के निर्देश पर एफआइआर दर्ज हुई। निलंबन की संस्तुति भी शासन को भेजी गई। हालांकि एडीओ पर कोई कार्रवाई अभी तक सामने नहीं आई। वहीं, पंचायत उद्योगों में लाभांश हड़पने के मामले पर प्रधानों ने भी हुंकार भरी थी। ऐसे में एडीओ का पल्ला अफसर पर भारी पड़ा। वर्जन--

शासन को जांच रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। जो निर्देश मिलेंगे उनका अनुपालन किया जाएगा।

--सत्येंद्र कुमार, सीडीओ।

Posted By: Jagran

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