जागरण संवाददाता, बरेली : अपर सेशन जज-10 उमेश चंद्र पांडेय ने जाली नोट बनाकर बाजार में चलाने वालों को अलग-अलग दफाओं में कुल 35 साल कैद की सजा सुनाई है। चूंकि, सभी दफा में सजा एक साथ चलेगी इसलिए दोषियों को 10 साल कैद में रहना होगा।

कोतवाली बारादरी के तत्कालीन दारोगा अनुज त्यागी ने 12 जनवरी 2004 को गश्त के दौरान शहामतगंज बाजार से मुखबिर की सूचना पर भगवान स्वरूप निवासी कमुआ थाना हाफिजगंज व चंद्रपाल निवासी बोहित थाना सीबीगंज को नकली नोटों के साथ हिरासत में लिया था। दोनों के पास से 100 व 50 के कुल 24 नोट बरामद हुए। पूछताछ पर आरोपितों ने बताया कि वे इज्जतनगर की छोटी विहार में किराये के मकान में नकली नोटों को छापकर बाजार में चलाते हैं। आरोपितों ने अपने अन्य साथियों के नाम भी बताए थे। इस पर पुलिस ने प्रेमपाल निवासी भोजीपुरा व खेमकरन निवासी कमुआ को भी नकली नोटों के साथ गिरफ्तार कर लिया। मौके से प्रिंटर, फोटो स्टेट मशीन आदि भी बरामद हुए। दोनों आरोपितों से पुलिस ने 50-50 के 40 नोट बरामद किए। जिनमें वाटरमार्क नहीं था। अधिकतर नोट एक ही नंबर के थे। मामले की सुनवाई अपर सेशन जज-10 की कोर्ट में हुई। सरकारी वकील ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव ने कोर्ट में चार गवाह पेश किए। अपर सेशन जज ने दोषियों को नकली नोट छापने व उन्हें बाजार में खपाने के जुर्म में तीन दफाओं में 10-10 वर्ष व एक दफा में पाच वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही 2 लाख 80 हजार रुपये जुर्माना भी भुगतना होगा।

तथ्य

-कोर्ट ने चारों दोषियों पर डाला 2.80 लाख का जुर्माना

-बारादरी पुलिस ने 14 साल पहले किया था गिरफ्तार

Posted By: Jagran

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