जेएनएन, बरेली। शिम्भुआ एफसीआइ सेंटर पर दर्जनों किसानों को खरीदे गए गेहूं का भुगतान नहीं किया गया। पीड़ितों ने डीएम से इसकी शिकायत की तो उन्होंने विभागीय जांच बैठा दी। पड़ताल में पता चला कि किसानों से खरीदे गए गेहूं को एक गोदाम में छिपाकर रखा गया है। साथ ही उस पर लोन ले लिया गया। इस पर गोदाम को सील कर दिया गया और विपणन अधिकारी की ओर से ठेकेदार, राइस मिलर व मुनीम पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

पीलीभीत जिले में पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव शिम्भुआ में भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्र का ठेका गांव सबलपुर निवासी गल्ला व्यापारी घनश्याम दीक्षित उर्फ ¨टकू की पत्नी सुनीता दीक्षित के नाम था। राइस मिलर समरवीर ¨सह भी इसमें साझेदार थे। सेंटर पर गेहूं की सारी खरीद घनश्याम दीक्षित ने की थी। 30 जून को सिरसा जंगल में घनश्याम दीक्षित की जहर देकर हत्या कर दी गई। उनकी हत्या के बाद दर्जनों किसान डीएम से पास पहुंचे और सेंटर पर बेचे गए गेहूं का भुगतान न मिलने की शिकायत की। डीएम ने मामले की विभागीय जांच कराई तो पूरा खेल सामने आ गया। इसके बाद पचपेड़ा स्थित गोदाम में रखा सेंटर का गेहूं सील कर दिया गया। वहीं, मंगलवार को विपणन अधिकारी ने कोतवाली में किसानों का रुपया गबन करने पर ठेकेदार सुनीता दीक्षित, सत्यवीर सिंह और मुनीम विपिन दीक्षित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। विपणन अधिकारी ने तहरीर में बताया कि सेंटर पर खरीदे गए गेहूं का भुगतान किसानों को न देकर उस पर लोन ले लिया गया। जबकि कच्ची पर्ची व फर्जी चेक देकर तीनों ने किसानों को गुमराह किया। बता दें कि सेंटर पर विभाग के अधिकारियों की नाक के नीचे पूरा खेल चलता रहा, लेकिन उन्हें इसकी भनक नहीं लगी या फिर यूं कहे की सबकुछ जानकार अनजान बने रहे। फिलहाल, जांच जारी है। मामले में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की भी गर्दन फंस सकती हैं।

Posted By: Jagran

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