जागरण संवाददाता, बरेली: नबीरे आला हजरत एवं आइएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां के देवबंद जाने को मुफ्ती-ए-कराम के पैनल ने हराम करार दिया है। पैनल का फतवा आने के बाद मौलाना तौकीर रजा खां ने देवबंद जाने से तौबा की लेकिन जब इस संबंध में उनसे फोन पर बात की गई तो मौलाना ने तौबा के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया।

आइएमसी प्रमुख सप्ताह भर पहले दहशतगर्दी के आरोपी की हिमायत में देवबंद गए थे। मुसलमानों के मिल्ली मसायल पर सभी मसलकों को एक करने के लिए दारुल उलूम देवबंद जाकर वहां के प्रमुख उलमा से मुलाकात की थी। मौलाना के कदम का खानदान आला हजरत और बरेलवी उलमा में विरोध होने लगा। वहीं देश के तमाम उलमा ने इसे बेहतर कदम बताया था। इस पर दरगाह आला हजरत के पूर्व सज्जादानशीन एवं मौलाना तौकीर के बड़े भाई मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मौलाना अहसन मियां ने देवबंद जाने के मामले में शरीयत का क्या हुक्म है? इस फैसले के लिए सात सदस्यीय मुफ्ती-ए-कराम का पैनल बनाया था। पैनल में शामिल मुफ्ती ने दरगाह के सज्जादानशीन के घर आइएमसी प्रमुख को बुलाकर पक्ष सुना। अखबार के बयान पर भी चर्चा की। इसके बाद शरीयत के मुताबिक फैसला तैयार किया गया। बुधवार को मुफ्ती-ए-कराम ने शरई फैसला सज्जादानाशीन को सौंपा। मौलाना तौकीर रजा खां की मौजूदगी में मौलाना तौसीफ रजा खां ने फैसला पढ़कर सुनाया। इसमें मौलाना तौकीर के देवबंद जाने को हराम करार दिया गया था। इसलिए शरई हुक्म के अनुसार मौलाना से तौबा की बात कही। इस पर मौलाना ने तौबा की। इसके साथ ही मसलके आला हजरत पर होने और हमेशा चलने की बात कही लेकिन जब इस बारे में मौलाना तौकीर से बात की गई तो तौबा के मामले में उन्होंने कुछ नहीं कहा। बोले, इंसान को हर वक्त तौबा करनी चाहिए। क्या मालूम कौन सी सांस आखिरी हो। मौलाना ने कहा, देवबंद जाना ही नहीं, झूठ बोलना, टीवी देखना, फोटो खिचवाना आदि भी हराम है। फिर भी तमाम उलमा यह कर रहे हैं। ऐसे लोगों से भी तौबा कराई जाए। मुसलमानों के मिल्ली मसायल को लेकर फिर देवबंद जाने के सवाल पर बोले, मुझे मुल्क से मुहब्बत है। मुल्क के लोकतंत्र और अपनी कौम के युवाओं को आतंकवाद से बचाने के लिए शरीयत के दायरे में देवबंद ही नहीं हर कहीं जाऊंगा।

-वर्जन

मुफ्ती-ए-कराम ने फैसला सुना दिया है। मौलाना तौकीर रजा खां साहब के देवबंद जाने पर हराम का फतवा दिया गया। इस पर मौलाना ने तौबा कर ली है।

मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी

दरगाह आला हजरत