बाराबंकी :पिछले एक पखवारे से पराली का धुंआ धूप को लील रहा है और धुंध गहरी होती जा रही है। पराली जलाने वालों पर कार्रवाई की औपचारिकता भर देखने को मिली है। अब तक महज 17 किसानों पर जुर्माना किया गया है। जबकि, हकीकत यह है कि हर एक गांव में इससे ज्यादा किसान पराली जला चुके हैं। जैसे-जैसे धान कट रहा है वैसे-वैसे पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

सुबह सूर्य तो दिखाई पड़ता है पर धूप धुंध को चीरकर बाहर नहीं निकल पाती। दोपहर एक-दो बजे धूप की थोड़ी-बहुत चमक भले ही दिखाई देती है लेकिन तीन बजे के बाद माहौल ऐसा हो जाता है मानो शाम के छह बज गए हों। धूप न निकलने से सबसे ज्यादा समस्या कपड़ों को सुखाने की है।

सोलर लाइटें चार्ज नहीं हो पा रहीं। इसके चलते शाम को सोलर लाइटों की रोशनी मध्यम हो जाती है।

पिछले साल सेटलाइट से खींची गई थी तस्वीरें : पिछले साल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सेटलाइट से जिले के खेतों में पराली जाने के 180 से ज्यादा मामलों की तस्वीरें भेजकर प्रशासनिक दावे की पोल खोल दी थी। तब तत्कालीन डीएम उदयभानु त्रिपाठी ने पराली जलाने वालों पर कार्रवाई में सख्ती दिखाई थी। इस बार डीएम डॉ. आदर्श सिंह ने भी प्रत्येक तहसील में पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए टीमें गठित कराई हैं लेकिन टीमों की सक्रिय दिखाई नहीं पड़ रही। शनिवार को भी नगर पंचायत जैदपुर से सफदरगंज जाने वाली रोड के किनारे खेतों में पराली जलाने से धुएं की धुंध उठती दिखी।

प्रदूषण मापने की व्यवस्था नहीं : प्रदूषण का स्तर मापने की व्यवस्था जिले में नहीं हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का जिले में कोई कार्यालय भी नहीं है। उपकृषि निदेशक डॉ. एके सागर का कहना है कि उनके कार्यालय परिसर में मौसम का हाल जानने वाले यंत्र लगे हैं लेकिन प्रदूषण मापक यंत्र नहीं हैं।

पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना के साथ ही उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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