बाराबंकी, [प्रेम अवस्थी]। सत्य नरायन की कहानी भी कागज फिल्म की तरह है। पुत्रियों ने ही मां की मौत के बाद पिता को भी मुर्दा घोषित करा दिया और जमीन की वरासत अपने नाम कराकर जमीन बेच दिया। ग्राम पंचायत अधिकारी ने परिवार रजिस्टर की नकल में सत्य नरायन को मुर्दा घोषित कर दिया था। तब से वह जिंदा होने का सबूत निरंतर पेश कर रहा है।

वर्ष 2013 में तत्कालीन डीएम मिनिस्ती एस ने उसे जिंदा घोषित कराने में अहम भूमिका निभाई। परिवार रजिस्टर की नकल में वह जिंदा घोषित भी कर दिया गया, लेकिन तहसील नवाबगंज की परगना प्रतापगंज सहित अन्य अदालतों में लंबित मुकदमों वह खुद का अभी तक जिंदा नहीं साबित कर सका है। कानूनी दांव पेंच में उलझे सत्य नारायण ने एक बार फिर 23 नवंबर को जिलाधिकारी अविनाश कुमार को अपनी कथा-व्यवस्था सुनाकर जिंदा होने का सबूत दिया है। डीएम ने एसडीएम नवाबगंज को समस्या का निदान के लिए निर्देशित किया है।

अपने बने दुश्मन

सत्य नरायन के मुताबिक वर्ष 2005 में 12 अक्टूबर को उसकी पत्नी सरोज कुमारी निवासी ग्राम बड़ेल (अब नगर पालिका परिषद नवाबगंज का हिस्सा) का निधन के बाद उसी परिवार रजिस्टर की नकल में पत्नी के साथ उसे भी तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी फतेह बहादुर तिवारी ने मृत दर्शा दिया। जमीन की गलत तरीके से 23 अक्टूबर 2005 को वरासत उसकी पुत्रियों प्रीति सैनी व ज्योति सैनी के नाम से कर दी गई। वरासत के जरिए जमीन पुत्रियों के नाम आ गई उसे संबंधित लोगों ने बेचवा दिया। वरासत निरस्त कराने के लिए सत्य नरायन ने नायब तहसीलदार प्रतापगंज के न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया। वर्ष 2006 में दाखिल किया, लेकिन अभी तक मुकदमे का निस्तारण नहीं किया गया। इसमें खास बात यह है कि बेटी प्रीति ने अपने पिता को मृत घोषित कराया और प्रीति के पति पवन सैनी अपने सुसर सत्यनरायन के साथ है। उनकी लगातार मदद भी कर रहे हैं।

अगली पेशी की तिथि 30 नवंबर 2022 को

सत्य नरायन का कहना है कि वर्ष 2013 में तत्कालीन डीएम मिनिस्ती एस ने उसकी समस्या गंभीरता से सुनी और जांच कराई। जांच के बाद 23 अक्टूबर 2013 को तत्कालीन बंकी ब्लाक की ओर से जारी की गई परिवार रजिस्टर की नकल में उसे जिंदा घोषित किया गया। गलत वरासत दर्ज किए जाने के मुकदमे में उसे जिंदा नहीं माना जा रहा है। जबकि गवाही व साक्ष्य सभी हो चुका है। अगली पेशी की तिथि 30 नवंबर 2022 को है।

दर्ज कराया था मुदकमा

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सत्य नरायन की तहरीर पर वर्ष 2013 में जालसाजी का मुकदमा नगर कोतवाली में क्राइम नंबर 707/13 दर्ज किया गया। परिवार रजिस्टर की नकल में सत्य नरायन को मुर्दा घोषित करने वाले ग्राम पंचायत ग्राम पंचायत अधिकारी फतेहपुर बहादुर तिवारी, वरासत करने वाले लेखपाल शिवाकांत द्विवेदी, दस्ता नवीश गणेश शंकर, जमीन लिखाने वाले बड़ेल गांव के अनुराग यादव, बाबादीन तथा दोनों पुत्रियों ज्योति व प्रीति सैनी को नामजद किया गया था।

मुकदमे अनुराग यादव व बाबादीन जमानत पर हैं। फतेहपुर बहादुर जेल गए थे, जिनकी दो दिन बाद जमानत हो गई थी। पिछले साल फतेहपुर बहादुर तिवारी का निधन हो चुका है। गणेश शंकर ने गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से स्थगनादेश ले रखा है। ज्योति सैनी भी हाईकोर्ट गई थी। इस मुकदमे में तारीख 18 फरवरी 2023 लगी है। गणेश शंकर हाईकोर्ट से स्टे पर है।

Edited By: Anurag Gupta

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